मिर्जापुर से गाजियाबाद की दूरी करीब 800 किलोमीटर होगी। भाजपा लगभग साढ़े चार महीने में यह दूरी तय करके गाजियाबाद पहुंच तो गई, पर इस दौरान वह एक कदम भी आगे बढ़ती नहीं दिखी।
सिवाय सदस्यता के लिए मिस्ड कॉल करने वालों का आंकड़ा करीब दो करोड़ पहुंचाने के वह जहां की तहां खड़ी रही।
मिर्जापुर में दिसंबर 2014 में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में राज्य सरकार के कामकाज को लेकर आंदोलन करने व पंचायत चुनाव की तैयारियों में जुटने की कार्ययोजना बनाने के फैसले इक्का-दुक्का मामलों को छोड़कर या तो नेताओं की जुबान तक ही रह गए या फाइलों में दब गए। अब कार्यसमिति की एक और बैठक 10 मई से गाजियाबाद में शुरू हो रही है।
मिर्जापुर से गाजियाबाद तक के पड़ाव के दौरान कई ऐसी घटनाएं घटीं, जिन्हें भाजपा मुद्दा बना सकती थी, पर जहां लड़ाई के पुराने फैसले ही जमीन पर न उतर पा रहे हों तो नए आंदोलन की बात ही बेमानी है।
अगस्त 2014 में वृंदावन में हुई प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के फैसलों का भी यही हश्र हुआ था। इसलिए गाजियाबाद की बैठक से भी महत्वपूर्ण फैसलों के जमीन पर उतरने की संभावनाएं काफी क्षीण ही दिखती हैं।