आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से बृहस्पतिवार बड़ी को राहत मिली है। अब संजय सिंह को सुल्तानपुर की ट्रायल कोर्ट में सरेंडर नहीं करना पड़ेगा। हाईकोर्ट ने संजय सिंह की पुनरीक्षण याचिका विचारार्थ मंजूर करके उन्हें सुनाई गई सजा के फैसले के अमल पर अगले आदेशों तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने उन्हें इसके लिए 50 हजार रूपए का निजी बंधपत्र वचन के साथ दाखिल करने का आदेश दिया।
न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की एकल पीठ ने यह आदेश संजय सिंह की ओर से दाखिल पुनरीक्षण याचिका पर दिया। इसमें उन्होंने सुल्तानपुर की ट्रायल कोर्ट और वहीं की अपील कोर्ट के फैसले व आदेशों को कानून की मंशा के खिलाफ कहकर चुनौती दी थी।
अभियोजन के मुताबिक पानी बिजली की समस्या को लेकर 23 साल पहले दिए गए धरना प्रदर्शन मामले में सुल्तानपुर की निचली अदालत ने संजय सिंह को 3 माह के साधारण कारावास के साथ एक हजार रुपए जुर्माने की सजा सुना दी थी। इसके खिलाफ दाखिल अपील को वहां की एक सत्र अदालत ने खारिज कर उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ संजय सिंह ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल कर बरी करने का आग्रह किया।
हाईकोर्ट ने कहा कि निचली दोनों अदालतों के फैसले और आदेश दोषपूर्ण हैं। ऐसे में कानूनी प्रावधानों के तहत अभियुक्त के जेल में नहीं होने पर भी कोर्ट सजा को निलंबित कर सकता है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने पुनरीक्षण याचिका को विचारार्थ मंजूर कर निचली अदालत से इसका रिकार्ड तलब कर लिया। कोर्ट ने कहा कि अगले आदेशों तक संजय सिंह द्वारा 50 हजार का निजी बंधपत्र दाखिल करने के अधीन उन्हें सुनाई गई सजा के फैसले और आदेशों के अमल पर रोक रहेगी। साथ ही कोर्ट ने उन्हें यह वचन देने का भी आदेश दिया कि जब पुनरीक्षण याचिका सुनवाई को सूचीबद्ध होगी तब संजय सिंह या उनके अधिवक्ता पेश होंगे।