गिरोह बच्चों को बेचने के लिए आईवीएफ के लिए जाने वाले दंपती पर नजर रखता था। आईवीएफ सेंटर में काम करने वाली गिरोह की सदस्य दंपती से संपर्क बढ़ाती थीं। जिस दंपती को आईवीएफ से बच्चा नहीं होता था, उनसे संवेदना व्यक्त किया जाता। बातचीत में नवजात उपलब्ध कराने का वादा करते थे। नि:संतान दंपती बच्चे की लालसा में उनके झांसे में आ जाते और नवजात खरीद लेते थे।
बड़ी फाइल यानी लड़का, छोटी फाइल लड़की
पुलिस ने बताया कि गिरोह के सदस्य आपस में कोड वर्ड में बात करते थे। आरोपी लड़के को बड़ी फाइल और लड़की को छोटी फाइल से संबोधित करते थे। लड़कों की मांग ज्यादा होने के कारण उसके ज्यादा रुपये की मांग करते थे। लड़की को कम रुपयों में भी बेच देते थे।
गोरा होने की गारंटी, नहीं तो बच्चा वापस
बच्चे का रंग सांवला होने पर एक सप्ताह में गोरा होने की गारंटी भी देते थे। एक सप्ताह में बच्चे का रंग साफ न होने पर उसे वापस लेने की गांरटी भी दी जाती थी। गिरोह इच्छुक दंपती को बच्चों की फोटो भेजता था। दंपती जो फोटाे पसंद करते थे, उन्हें वह नवजात बेच दिया जाता था। ये लोग सभी धर्म के नवजात उपलब्ध कराने का दावा भी करते थे।