UP :इस साल पहली बार बिजली कंपनियां समय पर नियामक आयोग में वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) व टैरिफ प्रस्ताव दाखिल कर सकती हैं। पावर कॉर्पोरेशन ने बिजली कंपनियों से 2023-24 के एआरआर और टैरिफ प्रस्ताव, 2021-22 की ट्रू-अप तथा 2022-23 की एनुअल परफॉर्मेंस रिपोर्ट (एपीआर) याचिका के लिए सूचनाएं तलब की हैं।
इस साल पहली बार बिजली कंपनियां समय पर नियामक आयोग में वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) व टैरिफ प्रस्ताव दाखिल कर सकती हैं। पावर कॉर्पोरेशन ने बिजली कंपनियों से 2023-24 के एआरआर और टैरिफ प्रस्ताव, 2021-22 की ट्रू-अप तथा 2022-23 की एनुअल परफॉर्मेंस रिपोर्ट (एपीआर) याचिका के लिए सूचनाएं तलब की हैं।
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पावर कॉर्पोरशन का जोर 30 सितंबर तक याचिका तैयार कराने पर है ताकि समय पर इसे दाखिल किया जा सके। विलंब से प्रस्ताव दाखिल होने पर नियामक आयोग द्वारा लगाए जाने अर्थदंड और लाभांश में भारी कटौती से बचने के लिए यह कवायद शुरू हो गई है।
विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों के अनुसार बिजली कंपनियों को हर साल 30 नवंबर से पहले अगले वित्तीय वर्ष का एआरआर व टैरिफ प्रस्ताव नियामक आयोग में दाखिल कर देना चाहिए ताकि 120 दिन में सारी औपचारिकताएं पूरी कर मार्च में टैरिफ ऑर्डर जारी हो जाए और एक अप्रैल से नई दरें प्रभावी हो जाएं। अब तक पावर कॉर्पोरेशन व बिजली कंपनियां समय पर एआरआर व टैरिफ प्रस्ताव दाखिल करने में नाकाम रही हैं। इससे तय समय पर नई बिजली दरें नहीं लागू हो पाती हैं और राजस्व नुकसान के साथ ही जुर्माना भी भरना पड़ता है।
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एआरआर और टैरिफ प्रस्ताव दाखिल किए जाने में लेटलतीफी को गंभीरता से लेते हुए पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष एम. देवराज ने इस बार अभी से ही याचिका तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू करा दी है। निदेशक (वाणिज्य) अमित कुमार श्रीवास्तव ने सभी बिजली कंपनियों के प्रबंध निदेशकों को पत्र भेजकर 30 नवंबर से पहले वर्ष 2023-24 का एआरआर व टैरिफ प्रस्ताव तथा अन्य याचिकाएं दाखिल किए जाने की जानकारी दी है। उन्होंने इसके लिए बिजली कंपनियों से सभी जरूरी सूचनाएं व आंकड़े तत्काल उपलब्ध कराने को कहा है जिससे 30 सितंबर तक याचिका को अंतिम रूप दिया जा सके।
बिजली कंपनियों मांगी गई ये जानकारियां
बिजली कंपनियों से 2021-22 का ऑडिटेड व अनंतिम लेखा तथा 2022-23 के छह महीने के बहीखाते के आंकड़े, अप्रैल से सितंबर तक श्रेणीवार बेची गई बिजली का ब्योरा, ऋण और देनदारियों तथा उस पर देय ब्याज, परिचालन एवं मेंटीनेंस की राशि के उपयोग समेत अन्य सूचनाएं मांगी गई जिसके आधार पर एआरआर व टैरिफ प्रस्ताव तैयार कराना जाना है।
एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि प्रबंधन का जोर 30 सितंबर तक याचिका तैयार कराने पर है। इस बार कोशिश यह है कि अक्तूबर में ही नियामक आयोग में याचिका दाखिल कर दी जाए ताकि अगले वित्तीय वर्ष की शुरुआत से नई दरों को लागू करने में किसी तरह की बाधा न हो।