यूपी के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह (फाइल फोटो)
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भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत से एसआईआर कराने के सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान पर जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा, सपा अध्यक्ष घुसपैठियों और फर्जी वोटरों को बचाने के लिए अनाप-शनाप बयान देकर जनता को बरगलाना चाहते हैं। बीएलओ की मौत पर भी वह राजनीति कर रहे हैं। किसी की मौत पर सियासत करना अखिलेश का पुराना शौक है।
जलशक्ति मंत्री ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि सभी को पता है कि एसआईआर के जरिये मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए मृतकों के नाम और मतदाता के नाम का दोहराव हटाया जा रहा है। जनता भी इसके पक्ष में है। बिहार ने इसकी पुष्टि भी कर दी है। फिर भी सपा अध्यक्ष को एसआईआर में लोकतंत्र का अपहरण दिखता है।
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उन्होंने कहा कि अखिलेश को यह डर सता रहा है कि फर्जी वोटिंग खत्म होने पर सपा की राजनीति भी खत्म हो जाएगी। प्रदेश में 1.62 लाख बूथों पर बीएलओ घर-घर जाकर फॉर्म भरवा रहे हैं। यह जनता को जोड़ने का काम है हटाने का नहीं। एसआईआर की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। 8.66 करोड़ यानी 56% प्रपत्र डिजिटाइज हो चुके हैं। बीते 24 घंटे में 1.14 करोड़ प्रपत्र डिजिटाइज हुए हैं। जनता भी इसमें सहयोग कर रही है, पर सपा मुखिया भय और भ्रम फैला रहे हैं।
सपा अध्यक्ष को सता रहा 2027 की हार का डर
उन्होंने कहा कि अखिलेश का डर यह है कि शुद्ध मतदाता सूची बनते ही उनका फर्जी वोटबैंक उजागर हो जाएगा। इसलिए वे वोट चोरी और लोकतंत्र खतरे में है, जैसे झूठ फैलाकर अपने गिरते जनाधार को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी राजनीति अब गिद्धों जैसी हो गई है। जहां भी कोई घटना हो, उस पर उनकी ओछी राजनीति शुरू हो जाती है। सपा अध्यक्ष लोकतंत्र से नहीं, 2027 में होने वाले चुनाव में हार के भय से बौखलाए हैं।