विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि सदन में विपक्ष को जितना मौका मिलेगा लोकतंत्र उतना ही मजबूत होगा। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के स्वागत में सदन को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सदन में सभी सदस्य जनता के बीच से चुनकर आएं और उन सभी ने सर्वसम्मति से विधानसभा अध्यक्ष को चुना है इसलिए विधानसभा अध्यक्ष को ध्यान रखना होगा कि निर्वाचित सरकार तानाशाह न बन जाए।
अखिलेश यादव ने विधानसभा में बतौर नेता प्रतिपक्ष अपने पहले भाषण में कहा कि विपक्ष को समय समय पर विधानसभा अध्यक्ष के संरक्षण की आवश्यकता होगी। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि विधानसभा अध्यक्ष राइट (सत्तापक्ष) से आएं है लेकिन उन्हें ध्यान लेफ्ट (विपक्ष) का ही रखना होगा। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष रैफरी है, ऐसा न हो कि वह खुद गेम का हिस्सा बन जाएं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जब विपक्ष के सदस्य सवाल उठाएंगे तो विधानसभा अध्यक्ष अपना कर्तव्य निभाते हुए सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के सहयोग के बिना स्वस्थ्य लोकतंत्र नहीं चल सकता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष जितना सवाल उठाएगा उतना लोकतंत्र मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष सर्वसम्मति से चुने गए हैं इसलिए सभी सदस्यों के अधिकारों का संरक्षण उनकी जिम्मेदारी है।
...जब अखिलेश ने खुद को योगी से संबद्ध किया
अखिलेश यादव ने अपना भाषण शुरू करते हुए सपा और विपक्ष के नेताओं की तरफ से विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने यह कहते हुए बात को आगे बढ़ाया कि वह नेता सदन की ओर से सदन में विस्तार से रखी गई बातों से खुद को संबद्ध करता हूं। यह भी संसदीय परंपरा की अनूठी मिसाल है जब एक नेता प्रतिपक्ष अपने प्रतिद्वंद्वी नेता सदन से खुद को संबद्ध करता है।
यदि विदेश नहीं जाता तो एक्सप्रेस-वे नहीं बना पाता
अखिलेश यादव ने कहा कि यदि मैं विदेश नहीं जाता तो देश का सबसे अच्छा एक्सप्रेस-वे नहीं बना पाता और कानपुर को मेट्रो रेल परियोजना नहीं दे पाता। उन्होंने कहा विधानसभा भवन तो ब्रिटिश शासन में बना था लेकिन नेता सदन जिस बिल्डिंग में बैठते है वह समाजवादी सरकार ने बनवाई थी।