समाजवादी पार्टी के फ्रंटल संगठनों की सूची जारी होने के बाद कई जिलों में विवाद की नौबत है। यह विवाद सोशल मीडिया पर भी छाया हुआ है। दूसरी तरफ तीन दिन बाद ही छात्रसभा के कई जिलाध्यक्षों के नाम बदल दिए गए हैं। समाजवादी पार्टी में फ्रंटल संगठनों समाजवादी लोहिया वाहिनी, मुलायम सिंह यूथ बिग्रेड, युवजन सभा, छात्रसभा की 17 जुलाई को प्रदेश कार्यकारिणी के साथ कई जिलों के जिलाध्यक्ष एवं महानगर अध्यक्ष की सूची जारी की गई। सूची जारी होने के बाद विवाद शुरू हो गया है। यह विवाद सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। पार्टी के कई युवा नेताओं ने खुलकर मुखालफत की है तो कुछ दबी जुबान से अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर कई युवा नेताओं ने यहां तक लिखा कि उन्हें बधाई ना दी जाए। क्योंकि वे संबंधित संगठन के लिए आवेदन नहीं किए थे। बिना उनसे पूछे पदाधिकारी बना दिया गया है। इसी तरह कुछ ने यह भी आरोप लगाया है कि संघर्षशील कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है। दूसरी तरफ 19 जुलाई को सपा छात्रसभा के कई जिलाध्यक्ष बदल दिए गए। प्रदेश कार्यालय से तीन दिन पहले जारी सूची में कासगंज का जिलाध्यक्ष उदयभान सिंह को बनाया गया था। इनके स्थान पर अब अभय यादव को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह सीतापुर में शुभम पाल केस्थान पर विनय कुमार को, प्रतापगढ़ में अंकित की जगह अमरेंद्र मौर्य को जिलाध्यक्ष, मेरठ जिलाध्यक्ष आनंद प्रकाश को अब महानगर अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।
इसके अलावा अमित डिंपी को एटा, अमित सिंह को गाजीपुर का जिलाध्यक्ष, सतीश यादव को वाराणसी महानगर अध्यक्ष, कार्तिकेय को जालौन का जिला उपाध्यक्ष और अमन सिंह को कुशीनकर बनाया गया है। इस संबंध में छात्रसभा के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय सिंह देव ने बताया कि सूची जारी करते समय टाइपिंग में कुछ समस्या हो गई थी, जिसमें सुधार किया गया है। बदलाव जैसी बात नहीं है। सभी पदाधिकारी पूरी सक्रियता से चुनावी तैयारी में जुटे हैँ। सोशल मीडिया पर नाराजगी जताने वालों से बात की जा रही है।