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यूपी: अंबेडकर नगर के बाद दूसरे जिलों में भी शाम चार बजे तक चल सकती है OPD, इमरजेंसी का बोझ भी होगा कम

Tue, 09 Jun 2026 07:54 PM IST
रोहित मिश्र चन्द्रभान यादव, अमर उजाला लखनऊ

सार

Medical Colleges in UP: अंबेडकर नगर जिले के महामाया राजकीय एलोपैथी मेडिकल कॉलेज ने नया प्रयोग करते हुए प्रदेश में पहली बार शाम चार बजे तक ओपीडी सुविधा शुरू की है।
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सरकारी अस्पतालों में ओपीडी। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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अंबेडकर नगर जिले के महामाया राजकीय एलोपैथी मेडिकल कॉलेज में शाम चार बजे तक ओपीडी चलाने से मरीजों को काफी राहत मिल रही है। प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों ने भी इस पर विचार शुरू कर दिया है। राजधानी के कई चिकित्सा संस्थान के अलग- अलग विभाग में भी देर शाम तक मरीज देखे जा रहे हैं। इससे इमरजेंसी पर अचानक बढ़ने वाला दबाव भी कम होगा।

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महामाया राजकीय एलोपैथी मेडिकल कॉलेज ने नया प्रयोग करते हुए प्रदेश में पहली बार शाम चार बजे तक ओपीडी सुविधा शुरू की है। इससे हर दिन करीब डेढ़ से दो सौ मरीजों को फायदा मिल रहा है। यह संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। अब अंबेडकर नगर की तर्ज पर कई अन्य मेडिकल कॉलेज भी इस दिशा में विचार शुरू कर दिए हैं। इसी तरह संजय गांधी पीजीआई में नेफ्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी, इंडोक्राइन सहित कई विभागों में शाम चार बजे के बाद तक ओपीडी चलाई जा रही है। लोहिया संस्थान के कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और यूरोलाजी में भी देर शाम तक ओपीडी चल रही है। यहां पर्चा दोपहर एक बजे तक ही बन रहा है, लेकिन आदेश है कि ओपीडी में जब तक मरीज रहे तब तक कोई न कोई फैकल्टी और वरिष्ठ रेजीडेंट मरीज देखते रहेंगे।

चार बजे तक ओपीडी चलाने के फायदे

चिकित्सा शिक्षा विभाग के जानकारों का कहना है कि शाम चार बजे तक ओपीडी चलाने का कई स्तर पर फायदा मिलेगा। कई कॉलेजों में फैकल्टी इमरजेंसी ड्यूटी के नाम पर जल्दी ओपीडी से चली जाती है, जबकि एक यूनिट में तीन से चार फैकल्टी होती है। ऐसे में एक की इमरजेंसी ड्यूटी रहे तो दूसरी फैकल्टी शाम चार बजे तक ओपीडी देर सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब चिकित्सा संस्थान सुपर स्पेशयिलिटी क्लीनिक देर शाम तक चला रहे हैं तो राजकीय एवं स्वशासी मेडिकल कॉलेजों में यह व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती है?
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जियोटैगिंग की भी व्यवस्था

अंबेडकर नगर स्थित मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि ओपीडी में जिस डॉक्टर की ड्यूटी रहेगी, उन्हें दो से तीन बजे के बीच लंच का वक्त मिलेगा। वे लंच के बाद दोबारा एक घंटे मरीज देखेंगे। यदि मरीज अधिक हैं तो आपस में एक-एक करके डॉक्टर लंच कर लेंगे। लंच के नाम पर सभी डॉक्टर ओपीडी से गायब न हो जाएं, इसके लिए जियो टैगिंग फोटोग्राफी की भी व्यवस्था कराई जा रही है। इससे डॉक्टरों की निगरानी बेहतर तरीके से हो सकेगी।
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