वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार भेड़िये का पहला हमला 17 जुलाई को मक्कापुरवा में हुआ था। भेड़िये ने अख्तर रजा के एक वर्ष के पुत्र को अपना निवाला बनाया था। भेड़िये के आखिरी हमले की घटना दो सितंबर को गठेरी में हुई थी। यहां ढाई वर्ष की अंजली को भेड़िये ने अपना शिकार बनाया था। हालांकि वन विभाग से इतर ग्रामीणों का दावा है कि जुलाई माह से पूर्व 10 मार्च को मिश्रनपुरवा में तीन वर्षीय सायरा को तो 23 मार्च को नयापुरवा से दो वर्षीय छोटू की हमले में मौत हुई थी।
क्या कहते हैं पीड़ित
गदामार कला के गढ़ीपुरवा निवासी हरीश चंद्र राव बताते हैं कि उन्होंने खुद ही भेड़िये को बच्चे का शव खाते देखा है। शिव दुलारी का दावा है कि उनके बेटों ने भेड़िये को घेर लिया था। वहां सभी ने उसे देखा। दूसरी ओर आयुष की मां खुशबू व उसके पिता प्रमोद अभी भी इस हालत में नहीं है कि वह यह बता सकें कि उनके बच्चे को घसीट कर एक किलोमीटर तक ले जाने वाला वन्यजीव भेड़िया था या फिर सियार। वे उस वन्यजीव को पकड़ने की मांग कर रहे हैं, जिसने उनके बच्चे को अपना निवाला बनाया।
महसी के नयापुरवा, मक्कापुरवा, नक्वा, कौलेला, सिंगिया नसीरपुर , पूरे बस्ती, गडेरिया, कुम्हारनपुरवा, दीवानपुरवा, गरेठी गुरदत्त सिंह, नौव्वन गरेठी में आठ लोगों की मौत भेड़िये के हमले में हो चुकी है। इनमें केवल एक अधेड़ था और बाकी सब बच्चे।
अभी स्पष्ट नहीं कि हमला कैसे हुआ
घटना के बाद मैं वहां गया था। ग्रामीण परेशान हैं। थर्मल सेंसर कैमरे के साथ ड्रोन से पूरे इलाके को स्कैन किया गया है। वहां भेड़िया नहीं मिला, न ही कोई मांद दिखाई दी है। यदि कोई भेड़िया दिखाई देता है तो उसकी जानकारी दी जाएगी। अभी लोगों को भेड़िये के नाम पर परेशान होने की जरूरत नहीं है। मृतक बच्चे के घाव से लिए सैंपल को लैब टेस्ट के लिए देहरादून भेजा गया है। जहां यह स्पष्ट हो पाएगा कि मौत किसके हमले से हुई है। -अजीत प्रताप सिंह डीएफओ