खून की समान्य जांच से हेपेटाइटिस ‘बी’ और ‘सी’ का पता लगाया जा सकता है। क्योंकि मरीज में शुरुआती लक्षण न दिखने के कारण इस बीमारी का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है।
प्रदेश में 60 से 70 लाख लोग हेपेटाइटिस ‘बी’ और लगभग 12 लाख लोग हेपेटाइटिस ‘सी’ से पीड़ित हैं। दोनों वायरस के संक्रमण का कोई लक्षण न होने के कारण गंभीर स्थिति में ही बीमारी का पता चलता है।
जब मरीज को बीमारी का पता चलता है तो उसको लिवर सिरोसिस या फिर लिवर कैंसर हो चुका होता है। ऐसी स्थिति में मरीज को लिवर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
बलरामपुर अस्पताल में शनिवार को आयोजित सीएमई में ये जानकारी एसजीपीजीआई के गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग के डॉ. अभय वर्मा ने दी।
उन्होंने बताया कि लिवर ट्रांसप्लांट के लिए आने वाले अधिकतर मरीजों में बीमारी का कारण हेपेटाइटिस सी है। इस बीमारी के शुरुआती लक्षण नहीं दिखते।
इसीलिए संक्रमण का पता लगाने के लिए आमतौर पर लोग कोई भी जांच नहीं कराते। ऐसे में ये संक्रमण छिपा रह जाता है।
रक्तदान करने वालों को इसके संक्रमण की जानकारी नहीं दी जाती सिर्फ रक्तदाता के खून को फेंक दिया जाता है।