हजारों करोड़ रुपये के कथित जीएसटी घोटाले के मास्टरमाइंड भगवान सिंह उर्फ भूरा प्रधान की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियों ने उन अधिकारियों और कर्मचारियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है, जिन पर इस नेटवर्क को संरक्षण देने का आरोप है। विशेष जांच दल (एसआईटी) को आरोपी के कब्जे से मिले डिजिटल उपकरणों से ऐसे अहम साक्ष्य मिले हैं, जिनसे विभागीय स्तर पर हड़कंप मच गया है।
प्रारंभिक जांच से यह भी संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क केवल एक राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि अंतरराज्यीय स्तर पर फैला हुआ था। कई जिलों की पहचान की गई है, जहां यह सिंडिकेट सक्रिय था और स्थानीय अधिकारियों से इसकी सीधी सांठगांठ थी। आरोपी मूल रूप से मथुरा जिले के हताना (कोसीकलां) का निवासी है, जिसे इस पूरे नेटवर्क का प्रमुख संचालन केंद्र माना जा रहा है।
अब विभागीय स्तर पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई की तैयारी है। जिन अधिकारियों के नाम डिजिटल साक्ष्यों में सामने आए हैं, उनकी सूची का मिलान व्हाट्सएप चैट और कॉल डिटेल रिकॉर्ड से किया जा रहा है। इसमें ट्रक छुड़वाने के लिए प्रति ट्रक 20 से 30 हजार रुपये की दर तय होने की बात सामने आई है। पिछले दस वर्षों में कथित रूप से अवैध लाभ लेने वाले सभी लोगों की भूमिका की जांच कर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।