एलडीए के रिकॉर्ड रूम में लगी आग में बड़ी संख्या में बिना स्कैन की हुई फाइलें भी जल गई हैं। निजी एजेंसी का कहना है कि जांच की जा रही है कि स्कैन के लिए कौन-कौन सी फाइलें आईं थीं। वहीं एलडीए के रिकॉर्ड रूम में लगी आग स्कैन किए गए डाटा को भी नुकसान पहुंचा सकती है। इसकी वजह यह है कि जिस कम्प्यूटर में स्कैन होने के बाद डाटा सुरक्षित किया गया था। वह कम्प्यूटर भी आग लगने वाले कमरे में ही मौजूद था।
आग बुझाने के समय अग्निशमन विभाग की टीम ने जब पानी डाला, तब सीपीयू में लगी हार्ड डिस्क भीग गई। इसकी वजह से डाटा क्रेश होने की आशंका खड़ी हो गई है। राइटर कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर अभिषेक का कहना है कि हार्ड डिस्क में मौजूद डाटा को रिकवर होने से बचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। आईटी प्रोफेशनल को यह हार्ड डिस्क दी गई है जिससे कि डाटा का एक्सल शीट में बैकअप लिया जा सके। इसके बाद ही पता चल सकेगा कि कौन सी फाइलों को स्कैन कर लिया गया था।
चिंगारी से सोफा और गद्दे में पकड़ी आग, फिर फैली
एलडीए के रिकॉर्ड रूम में जो आग लगी। वह आग सिंथेटिक शीट के बने सोफा और वहां रखे हुए पुराने पर्दे के सुलगने से फैली। इसके बाद आग फाइलों तक पहुंच गई। रिकॉर्ड रूम में स्मोक डिटेक्टर और फायर अलार्म खराब होने से अलार्म नहीं बजा। इससे करीब आधे घंटे से अधिक समय तक आग रिकॉर्ड रूम में फैलती रही।
काफी देर के बाद रिकॉर्ड रूम के बाहर लॉबी के दूसरी तरफ कमरे में फाइलें स्कैन कर रहे निजी कंपनी राइटर के कर्मचारी को धुआं निकलता दिखाई दिया। इसके बाद आग की सूचना सुरक्षाकर्मियों को दी जा सकी। रिकॉर्ड रूम में फायर एक्टिंग्विशर भी नहीं होने से भी आग बुझाने में देरी हुई। अभी तक सामने आए तथ्यों के मुताबिक रिकॉर्ड रूम के अंदर की तरफ के कमरे में शॉर्ट सर्किट हुआ।
प्लास्टिक के पाइपों से की गई थी वायरिंग
- फोटो : amar ujala
खुद अधिकारियों का मानना है कि अगर फायर सिस्टम ठीक से काम कर रहा होता तो नुकसान को होने से रोका जा सकता था। रिकॉर्ड रूम की सुरक्षा का आलम यह था कि वहां प्लास्टिक के पाइपों में बिजली की वायरिंग की गई थी जिससे शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका सबसे अधिक रहती है।
अग्निशमन विभाग का नंबर तक नहीं था, इंटरनेट से ढूंढा गया
मौके पर मौजूद एक कर्मचारी ने बताया कि आग लगने के समय तीसरी और चौथी मंजिल पर एक-एक कर्मचारी स्कैनिंग का काम कर रहा था। चौथी मंजिल पर धुआं दिखने के बाद तीसरी मंजिल पर काम कर रहे स्टाफ को पहले वाले कर्मचारी ने बताया। इसके बाद दोनों भागकर नीचे ड्यूटी कर रहे सुरक्षाकर्मियों को बुलाने के लिए भाग कर गए। आग बुझाने के लिए दूसरे तलों से फायर एक्टिंग्विशर लाए गए। अग्निशमन विभाग को सूचना देने के लिए सुरक्षाकर्मियों के पास तक फोन नंबर नहीं था। इसके बाद मोबाइल से इंटरनेट पर नंबर सर्च कर कॉल किया गया।
निजी एजेंसी ने पल्ला झाड़ा : जले या चोरी हो जाए रिकॉर्ड, हमें क्या?
एलडीए के रिकॉर्ड रूम में फाइलें इस समय निजी एजेंसी की देखरेख में हैं। रविवार को छत की तरफ लॉबी के पास बने कमरे में रिकॉर्ड रखे हुए मिले। इस कमरे को लॉक जरूर किया हुआ था। इसके उलट छत की तरफ से कमरे के कांच टूटे हुए थे। यहां गत्ता लगाकर किसी के आने को रोका गया था। इन गत्तों को फाड़कर कोई भी वहां आसानी से रिकॉर्ड तक पहुंच बना सकता है। इसके बाद भी लापरवाही बनी हुई है। यह लापरवाही बाकी फाइलों को भी गायब करने या जलाने के रूप में सामने आ सकती है।
10:30 बजे रात में अंतिम एंट्री
- फोटो : amar ujala
राइटर कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि रात में करीब 10:30 बजे अंतिम बार उनका ही स्टाफ अंदर गया। उस समय वहां सबकुछ सामान्य था। इसके बाद किसी भी बाहरी या एलडीए स्टाफ को वहां आते हुए नहीं देखा गया। हमारा खुद का स्टाफ भी इसके बाद अंदर नहीं गया। सीसीटीवी कैमरा भी रिकॉर्ड रूम में नहीं होने की वजह से इस दावे की जांच नहीं हो पा रही है।
इनके दावे कितने सच्चे
अधिकतर फाइल हो चुकीं स्कैन
मामले पर राइटर के प्रोजेक्ट मैनेजर अभिषेक का कहना है कि जिस कमरे में आग लगी, उस कमरे में भी स्कैनिंग का काम हम कर रहे थे। वहां अधिकांश फाइलें स्कैन कर ली गईं थीं। कुछ फाइलें ऐसी भी हैं, जिन्हें स्कैन करना बाकी था। अब हम अपने रिकॉर्ड से पता कर रहे हैं कि कौनसी फाइलें स्कैन होने के लिए बाकी थीं जोकि हादसे में जल गईं। हमारा स्टाफ आग लगने के बाद उसे बुझाने में सहयोग करता रहा। उन्हें जब पता चला तभी सुरक्षाकर्मियों को सूचना दी। हमारे स्टाफ ने ही अग्निशमन विभाग को आग बुझाने आने केलिए कॉल किया।
शासकीय प्रोजेक्टों की फाइलें सुरक्षित
एलडीए वीसी प्रभु एन सिंह का कहना है कि रिकॉर्ड रूम में जली हुई फाइलों की डुप्लीकेट कॉपी हमारे पास मौजूद हैं। शासकीय प्रोजेक्ट जैसे जेपीएनआईसी, जनेश्वर मिश्र पार्क, हुसैनाबाद के सौंदर्यीकरण के कामों की फाइलें भी हमारे पास सुरक्षित हैं। आग लगने की घटना की जांच की जा रही है। इसमें यह भी पता किया जा रहा है कि कौनसी फाइलें जली हैं। जो फाइलें जली हैं उनकी भी डुप्लीकेट फाइलें तैयार करा ली जाएंगीं। किसी का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।