डौंडियाखेड़ा में 1000 टन सोना जमीन में होने की रिपोर्ट जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) ने कभी नहीं दी थी। जीएसआई की रिपोर्ट को वहां खोदाई के लिए तोड़ मरोड़कर पेश किया गया।
शुक्रवार को यहां बीरबल साहनी पुरावनस्पति संस्थान में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में जीएसआई के उप महानिदेशक एसके शर्मा ने यह बात कही।
उप महानिदेशक ने कहा कि केंद्र सरकार ने जीएसआई से रिपोर्ट मांगी। जीएसआई ने अपनी रिपोर्ट में वहां एल्केलाइन पदार्थ मौजूद होने की बात कही।
रिपोर्ट में साफ तौर पर नॉन मेटेलिक पदार्थ की जानकारी दी गई। कहीं भी कॉपर या गोल्ड की मौजूदगी के बारे में नहीं बताया गया।
इसके बाद मीडिया में लगातार वहां जीएसआई की रिपोर्ट में सोना मौजूद होने की बात कही जाती रही।
राजनेताओं और खोदाई से जुड़े विभाग के अधिकारियों पर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि अपने फायदे के लिए रिपोर्ट को तोड़ मरोड़कर पेश कर दिया गया। उन्होंने वहां सोना मौजूद होना खुद ही तय कर लिया।
सेमिनार में मौजूद जीएसआई के एक और अधिकारी का कहना था कि ऐसा राजनीतिक फायदे के लिए किया गया।
इसमें स्थानीय जनप्रतिनिधि और खोदाई कराने वाले अधिकारियों की मुख्य भूमिका रही। पूरे मामले में जीएसआई की रिपोर्ट को गलत तरीके से पेश किया जाता रहा।
गौरतलब है कि एक महीने से ज्यादा समय तक चली खोदाई के बाद पुरातत्व विभाग ने खुद सोना मौजूद नहीं होने की बात कही। इसके बाद खोदाई बंद कराने के आदेश कर दिए गए।