लाल-नीली बत्ती लगाने का अधिकार न होने के बावजूद रुतबे के लिए यह शौक पालना महंगा पड़ सकता है।
प्रदेश सरकार ने अवैध लाल-नीली बत्ती लगाने वालों पर पांच गुना जुर्माना वसूलने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा है।
केंद्र से हरी झंडी मिलते ही प्रदेश में जुर्माने की बढ़ी हुई राशि वसूली जाएगी। इसमें पहली बार पकड़े जाने पर 5,000 रुपये और दूसरी बार 10,000 रुपये जुर्माना वसूला जाएगा।
मल्टीटोन हॉर्न लगाने वालों से भी इसी नियम के तहत जुर्माना वसूला जाएगा। यूपी सरकार ने मोटरयान अधिनियम 1988 में संशोधन का प्रस्ताव भेजा है।
इस अधिनियम में अवैध लाल-नीली बत्ती के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं है। वायु व ध्वनि प्रदूषण के उल्लंघन के तहत पहली बार पकड़े जाने पर एक व दूसरी बार पकड़े जाने पर दो हजार रुपये दंड लिया जाता है।
इस अधिनियम में दंड की सीमा निर्धारित करने का अधिकार राज्य सरकार को भी दिए जाने की व्यवस्था है। सरकार ने अधिकार न होने के बावजूद इसे लगाने वालों के खिलाफ जुर्माने का प्रस्ताव दिया है।
प्रमुख सचिव परिवहन बीएस भुल्लर ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के संयुक्त सचिव संजय बंदोपाध्याय को यह प्रस्ताव भेजा है।
केंद्र को पेनल्टी के नियम में संशोधन का अधिकार
मोटरयान अधिनियम में नियमों के उल्लंघन पर अपराध, आर्थिक दंड व प्रक्रिया से संबंधित संशोधन केंद्र सरकार ही कर सकती है।
लाल-नीली बत्ती व मल्टीटोन हॉर्न से संबंधित प्रावधान केंद्रीय मोटरयान नियमावली 1989 के नियम 108 व 119 में दिए गए हैं, लेकिन इसके उल्लंघन वा दंड का प्रावधान नहीं दिया गया है।
प्रदेश सरकार ने अधिनियम की धारा 177 के बाद 177 ए और जोड़ने का आग्रह किया है।