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संघ की सलाह, सियासत में इस्तेमाल होने से बचें मुस्लिम

Sat, 08 Aug 2015 09:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार ने कहा कि मुसलमानों को सियासत में इस्तेमाल होने से बचना चाहिए। उन्होंने किसी पार्टी का नाम लिए बगैर सपा पर निशाना साधा।
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कहा कि एक पार्टी मुसलमानों का वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करती है। मुसलमान भी इस पार्टी की सरकार बनवाने के लिए बेकरार रहता है, पर आज यह कार्यक्रम उस दल ने करवाया होता तो इस हॉल में सुरक्षा को लेकर आप लोगों की तलाशी ली जाती। दल के मुखिया से आप लोग मिल भी नहीं पाते। इस पर सभी मुसलमानों को विचार करना चाहिए।

इंद्रेश ने कहा कि याकूब मेमन की फांसी पर कुछ इंसानियत विरोधी ताकतें देश में दंगा-फसाद कराना चाहती थीं लेकिन मुसलमानों को बधाई कि उन्होंने इन साजिशों को कामयाब नहीं होने दिया। इंद्रेश शनिवार को यहां रवींद्रालय (चारबाग) में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के सम्मेलन में बोल रहे थे।
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इससे पहले देश भर से आए उलमा ने कहा कि मुसलमानों को कलाम को चुनना होगा न कि याकूब को। उन्हें साबित करना होगा कि याकूब जैसा आतंकी नहीं बल्कि कलाम साहब उनके आदर्श हैं।

मुस्लिम मंच ने इस सम्मेलन के जरिये देश भर के अलग-अलग सेक्टर के उलमा को बुलाकर उनसे यह उम्मीद की है कि वे देश भर में मुसलमानों के बीच दहशत, दंगा, हिंसा, नफरत के विरोध में आवाज उठाएं और मुसलमानों को शिक्षा का महत्व समझाएं।

नमाज पढ़ने या टोपी पहनने वाला हर शख्स मुसलमान नहीं

कर्नाटक से आए मौलाना इब्राहिम ने कहा कि मुसलमान ही मुसलमानों को कठघरे में खड़ा कर रहा है। मुसलमानों को समझना होगा कि नमाज पढ़ने या टोपी पहनने वाला हर शख्स सच्चा मुसलमान नहीं होता। जुरेखा और इब्राहिम नाम रखने वाला हर आदमी भी मुसलमान नहीं होता। ऐसे नाम वाला आतंकी भी कभी मुसलमान नहीं हो सकता।

देवबंद के मौलाना अब्दुल लतीफ ने कहा कि कुरान साफ तौर पर कहती है कि किसी को नुकसान न पहुंचाओ। फिर कैसे एक सच्चा मुसलमान आतंकी होकर किसी की जान लेने की कोशिश कर सकता है।

जान लेना जेहाद नहीं : मौलाना कासिम ने कहा कि जिस इस्लाम को जेहाद के नाम पर कुछ सिरफिरे बदनाम कर रहे हैं, उन्हें जेहाद का मतलब नहीं पता। जेहाद का अर्थ होता है अंधेरे में प्रकाश फैलाना। मजबूर की मदद करना। भूखे को खाना खिलाना। मौलाना हैदर ने कहा कि राजनीतिज्ञों ने मुसलमानों को संघ के खिलाफ  भड़काया और हिंदुओं को मुसलमानों के खिलाफ भड़काया।

अब्बास अली बोरा ने कहा कि अब मुस्लिमों को दिखाना है कि वे इस देश के प्रति वफादार हैं। देश के मालिक हैं किरायेदार नहीं। चंद लोगों की गलती से मुसलमानों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। इस्लाम कलंकित न हो यह पैगाम लेकर उलमा को पूरे देश में जाना है।
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दीनी के साथ दुनियावी तालीम भी लें मुसलमान

सम्मेलन में आए उलमा ने मुस्लिम समाज का आह्वान किया कि वे दीनी तालीम के साथ-साथ दुनिया की भी तालीम लें। वतन की मुहब्बत के साथ इंसान व इंसानियत की भी तालीम लें। देश में नौ अगस्त को अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया गया था।

उसकी पूर्व संध्या पर लखनऊ में हो रही यह उलमा कॉन्फ्रेंस मुसलमानों से आह्वान करती है कि वे ‘दशहत, दंगा, हिंसा, नफरत, भारत छोड़ो’ का अभियान शुरू करें। सम्मेलन को मंच के राष्ट्रीय संयोजक मो. अफजाल सहित अन्य कई उलमा ने संबोधित किया।

...इसलिए पगड़ी को भी प्रणाम और टोपी को भी सलाम
इंद्रेश कुमार को कुछ लोग टोपी तो कुछ लोग पगड़ी पहनाना चाहते थे, पर उन्होंने पहनने से इन्कार कर दिया। ऐसा करने आए युवकों को वापस भेजकर वे माइक पर आए और बोले, ‘कुछ लोग टोपी तो कुछ लोग पगड़ी पहनाना चाहते थे। मैं किसे पहले पहनूं और किसे बाद में?

मुझे लगता है कि इन्हें किसी ने भेजा था। मैं तो चाहता हूं कि हर आदमी अपने असली रूप में रहे। इसलिए पगड़ी को भी प्रणाम और टोपी को भी सलाम कहते हुए मैंने वापस कर दिया।’
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