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बुखार ने ली दो साल की मासूम की जान, स्वास्थ्य महकमा अनजान

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लखनऊ। राजधानी में बुखार का ताप अब मामू जिंदगियां झुलसाने लगा है। रविवार को बुखार से पीड़ित एक बच्ची की जान चली गई। निजी अस्पताल में भर्ती इस बच्ची को तीन दिन तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया, इसके बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों का कहना है कि बच्ची को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था।
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पॉलीटेक्निक चौराहे के पास रहने वाली दो वर्षीय हबीबा को पांच-छह दिन पहले तेज बुखार आया। इस पर घर वाले उसे निशातगंज स्थित एक अस्पताल ले गए। वहां वह दो दिन भर्ती रही। हालत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों ने बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी तो उसे मड़ियांव स्थित होपवेल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। वहां भी उसकी सेहत लगातार बिगड़ने पर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रख दिया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। अस्पताल के डॉ. तौफीक ने बताया कि बच्ची में डेंगू के लक्षण थे, लेकिन रिपोर्ट निगेटिव थी। अस्पताल में भर्ती करने के दूसरे दिन ही उसे वेंटिलेटर सपोर्ट देना पड़ा।
स्क्रब टाइफस की नहीं हुई जांच
डॉक्टर का कहना है कि बच्ची को एक यूनिट खून भी चढ़ाना था। उसे सांस लेने में तकलीफ थी। बच्ची में स्क्रब टाइफस के भी लक्षण दिख रहे थे, लेकिन इसकी जांच नहीं हो सकी।
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मौत की सूचना नहीं भेजी सीएमओ आफिस
बुखार से बच्ची की मौत के बाद निजी अस्पताल ने इसकी सूचना सीएमओ ऑफिस नहीं भेजी। ऐसे में अभी तक जिले में किसी मौत की पुष्टि नहीं हो सकी। निजी अस्पताल मरीजों की मौत बाद सरकारी पचड़े में पड़ने के डर से रिपोर्ट ही नहीं भेज रहे हैं। निजी अस्पताल आंकड़े दबाने में जुटे हैं। स्वास्थ्य विभाग भी बेफिक्र है।
डाटा देने में कर रहे आनाकानी
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई निजी अस्पताल अपने यहां भर्ती डेंगू व बुखार के मरीजों का डाटा नहीं भेज रहे हैं, जबकि इन्हें रोजाना डाटा भेजने के निर्देश है। हैं। सीएमओ डॉ. मनोज का कहना है कि डाटा न भेजने वाले अस्पतालों को नोटिस भेजकर कार्रवाई की जाएगी।
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