जानलेवा हो चुके डेंगू और वायरल का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को एडीज के डंक ने छह और लोगों की जान ले ली। मरने वालों में स्प्रिंगडेल स्कूल के दो स्टूडेंट्स यश और सोंचारी, पीसीएस अफसर मदनलाल की बेटी पुष्पांजलि, गोसाईंगंज के उमेश, कानपुर के शिवाजी व फैजुल्लागंज निवासी राकेश शामिल हैं। चिकित्सा संस्थानों, सरकारी व निजी अस्पतालों में कोहराम मचा हुआ है। वहीं फैजुल्लागंज में मौतों का आंकड़ा तीस तक पहुंच चुका है, स्थानीय निवासियों में खौफ बढ़ता जा रहा है।
स्प्रिंगडेल स्कूल में कक्षा दस के छात्र यश (15) और 11वीं की छात्रा सोंचारी बाग (16) की शुक्रवार को मौत हो गई। दोनों बच्चे 20 सिंतबर से स्कूल नहीं आ रहे थे। दोनों स्टूडेंट्स के निधन की खबर मिलते ही स्कूल में कॉन्डोलेंस के बाद छुट्टी कर दी गई। इसके बाद टीचिंग स्टाफ बच्चों के घर गया।
प्रिंसिपल रीता खन्ना का कहना है कि रोजाना 15 से 20 बच्चे बुखार की शिकायत के चलते छुट्टी ले रहे हैं। इस समय परीक्षाएं चल रही हैं, फिर भी माहौल को देखते हुए किसी पर भी दबाव नहीं डाला जा रहा।
यश और सोंचारी की बीमारी के कारण उनके लिए अलग से व्यवस्था की गई थी। उन्हें ऑफिस में अलग से बैठा कर परीक्षा दिलवाई जा रही थी, ताकि उन्हें जल्द से जल्द घर भेजा जा सके। स्कूल की प्रबंधक संतोष मिर्धा ने बताया कि शनिवार को होने वाला कार्यक्रम फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। कार्यक्रम की अगली तारीख बाद में घोषित की जाएगी। शनिवार को स्कूल खुला रहेगा।
इंदिरानगर निवासी शंकर जयराज श्रीवास्तव के बेटे यश केपरिवारीजनों ने बताया कि पहले उसका इलाज निजी अस्पताल में चल रहा था। तबीयत में सुधार न होने पर बृहस्पतिवार को उसे केजीएमयू ले जाया गया।
सोंचारी फाइल फोटो
- फोटो : amar ujala
शुक्रवार तड़के चार बजे उसका निधन हो गया। वहीं लिबर्टी कॉलोनी निवासी एसके बाग की बेटी सोंचारी के घरवालों ने बताया कि वह कई दिन से बीमार थी। बृहस्पतिवार की दोपहर में अचानक उसकी तबीयत काफी बिगड़ गई।
उसे पहले सद्भावना और फिर शेखर अस्पताल ले जाया गया। वहां छात्रा को भर्ती नहीं किया गया। यहां से छात्रा को सहारा अस्पताल ले जाने की तैयारी थी, लेकिन शाम को उसकी मौत हो गई।
दोनों ही छात्र-छात्राओं के साथ पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को इस बात का यकीन ही नहीं हो रहा कि कुछ दिन पहले तक वह जिनके साथ लंच शेयर करते और बातें करते थे, अब वे कभी नहीं आएंगे।
यश के एक दोस्त ने बताया कि वह पढ़ाई में बहुत अच्छा था। तबीयत खराब होने पर उसके पापा ने स्कूल जाने से मना भी किया, लेकिन यश बोला कि वह परीक्षा नहीं छोड़ेगा और स्कूल आया था।
रखें सावधानी
फुल कपड़े पहनाकर ही बच्चों को स्कूल या बाहर भेजें।
मॉस्किटो रिपेलेंट क्रीम का इस्तेमाल करें
स्कूल हो या घर समय-समय पर मच्छर मारने वाली दवा का भी स्प्रे कराएं
अस्पतालों की दौड़ में उखड़ी सांसें
पुष्पांजलि और उमेश (फाइल फोटो)
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एक तरफ शहर के अस्पताल ‘वीआईपी मरीजों’ की आगवानी के लिए हरदम तैयार हैं तो दूसरी ओर एक मरीज इसलिए दम तोड़ दे रहा है कि उसकी सिफारिश किसी रसूखदार ने नहीं की है। गोसाईंगंज के रामबख्श खेड़ा के उमेश कुमार उर्फ धुन्नी के साथ भी ऐसा ही हुआ।
तबीयत खराब होने पर कुछ दिन प्राइवेट इलाज चला, हालत नहीं सुधरी तो घरवाले सीएचसी ले गए। वहीं डॉक्टरों ने डेंगू बताकर सिविल रेफर कर दिया। सिविल अस्पताल में बेड नहीं मिलने पर उसे ट्रॉमा सेंटर भेजा गया।
वहीं से फिर सिविल लौटा दिया गया। इस बीच रास्ते में ही उमेश की सांसें थम गईं। वहीं एडीज के डंक ने पीसीएस अफसर की बेटी पुष्पांजलि (10) की भी जान ले ली। गोसाईगंज के सेमरा गांव के रहने वाले पीसीएस अफसर मदनलाल की बेटी को कुछ दिन पहले तेज बुखार की शिकायत हुई। परिवारीजनों ने उसे लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन हालत नहीं सुधरी। तीन दिन पहले पीजीआई की वेंटिलेटर यूनिट में भर्ती कराया जहां उसकी शुक्रवार को मौत हो गई।
पीसीएस अफसर मदनलाल उद्यान निदेशालय एवं सिंचाई विभाग में लेखाधिकारी के पद पर तैनात हैं। वहीं कानपुर शिवाजी वर्मा को कई दिनों से तेज बुखार की शिकायत थी। गंभीर हालत में उनको पीजीआई में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
इसी तरह फैजुल्लागंज के राकेश (32) को तेज बुखार की शिकायत के बाद बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हड़ताल की वजह से इलाज में दिक्कत होने पर परिवारीजन उनको चौक स्थिति निजी अस्पताल लेकर चले गए। जांच में पता चला कि राकेश को डेंगू है और प्लेट्लेट्स काउंट 13 हजार पहुंच गया है। तीन दिन तक इलाज चला लेकिन हालत नहीं सुधरी। शुक्रवार दोपहर में उनकी मौत हो गई।