प्रदेश में 2640 मेगावाट क्षमता के दो और बिजलीघरों पर जल्द काम शुरू होने जा रहा है। ओबरा ‘सी’ व जवाहरपुर परियोजना लगाने के लिए कंपनी के चयन की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। इन परियोजनाओं के लिए हुई बिड में दोसान पावर ने बीएचईएल व एलएंडटी को पछाड़कर परियोजना का काम हासिल करने की दौड़ में आगे हो गया है।
2 से 6 अगस्त तक राज्य विद्युत उत्पादन निगम व दोसान पावर के बीच दोनों परियोजनाओं को लेकर प्री-अवार्ड कॉन्फ्रेंस होगी और इसके बाद निदेशक मंडल, एनर्जी टास्क फोर्स और कैबिनेट की मंजूरी की औपचारिकता पूरी की जाएगी।
सितंबर में दोसान पावर को दोनों बिजलीघरों की स्थापना का वर्क ऑर्डर जारी करने के साथ ही मुख्यमंत्री के हाथों शिलान्यास की तैयारी भी की जा रही है। दोनों परियोजनाओं पर आठ-आठ हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
बिजली की उपलब्धता बढ़ाने की मुहिम के तहत सरकार ने सोनभद्र के ओबरा तथा एटा के जवाहरपुर में 1320-1320 मेगावाट क्षमता की नई बिजली परियोजनाएं लगवाने का फैसला किया है। ये परियोजनाएं इंजीनियरिंग, प्रक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड पर स्थापित की जाएंगी। दोनों परियोजनाओं की स्थापना के लिए हुई बिड में बीएचईएल, एलएंडटी तथा दोसान पावर कंपनियों ने हिस्सा लिया था।
यह कहना है अधिकारियों का
राज्य विद्युत उत्पादन निगम के अधिकारियों के अनुसार दोसान की बिड सबसे कम लागत की पाई गई। परियोजनाओं के लिए नियुक्त कंसल्टेंट ने भी तकनीकी एवं वित्तीय बिड का मूल्यांकन करने के बाद दोसान पावर को बिजलीघर लगाने का जिम्मा सौंपने की सिफारिश कर दी है। इसके बाद दोसान के साथ प्री-अवार्ड कॉन्फ्रेंस की तारीख तय की गई है।
सितंबर में जारी होगा वर्क आर्डर
विद्युत उत्पादन निगम के अधिकारियों के मुताबिक 2-6 अगस्त तक प्री-अवार्ड कॉन्फ्रेंस के बाद 12 अगस्त को राज्य विद्युत उत्पादन निगम निदेशक मंडल की प्रस्तावित बैठक में दोसान की बिड को मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
बोर्ड की मंजूरी के बाद मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली एनर्जी टास्क फोर्स के माध्यम से कैबिनेट का अनुमोदन लिया जाएगा और सितंबर में कंपनी को बिजलीघर लगाने का कार्यादेश जारी कर देने की संभावना है। कोशिश है कि विधानसभा चुनाव के एलान से पहले सारी औपचारिकताएं पूरी करके मुख्यमंत्री के हाथों दोनों परियोजनाओं का शिलान्यास करा दिया जाए।
स्थापित की जाएंगी दो सुपर क्रिटिकल इकाइयां
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ओबरा ‘सी’ व जवाहरपुर परियोजना के तहत 660-660 मेगावाट क्षमता की दो-दो सुपर क्रिटिकल इकाइयां स्थापित की जाएंगी।
आधुनिक तकनीक की इन इकाइयों को शत-प्रतिशत प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) पर चलाया जा सकता है। ये इकाइयां प्रदूषण नियंत्रण के लिहाज से भी काफी मुफीद मानी जा रही हैं। वहीं ओबरा में 25-30 साल पुरानी कम क्षमता की इकाइयों को हटाकर ओबरा ‘सी’ के तहत लगाने का प्रस्ताव है।
दूर होगी बिजली की किल्लत
मामले पर प्रमुख सचिव ऊर्जा संजय अग्रवाल का कहना है कि ओबरा ‘सी’ व जवाहरपुर परियोजना की स्थापना के बाद प्रदेश में बिजली की कमी काफी हद तक दूर हो जाएगी। कंपनी चयन में दोसान की बिड सबसे कम लागत की पाई गई। अगले सप्ताह उसके साथ प्री-अवार्ड कॉन्फ्रेंस होगी। इसके बाद अन्य सारी औपचारिकताएं पूरी कर सिंतबर तक कार्यादेश जारी करके काम शुरू करा दिया जाएगा।