हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने घर में घुसकर मारपीट करने आदि के आरोपों वाले दो मामलों में दोनों पक्षों के बीच सुलह-समझौता होने पर दोनों प्राथमिकियों को रद्द कर दिया।
ये दोनों मामले एक-दूसरे के खिलाफ गोंडा के नवाबगंज थाने में दर्ज कराए गए थे।
न्यायमूर्ति अमरेश्वर प्रताप शाही और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार त्रिपाठी की खंडपीठ ने बुधवार को यह फैसला दयाराम पांडेय व अन्य तथा संतोष उर्फ कक्के व चार अन्य की ओर से दायर दो याचिकाओं को मंजूर कर सुनाया।
इनमें दोनों पक्षों ने गुजारिश की थी कि अब उनके बीच सुलह हो गई है और अभी तक अदालत में आरोप पत्र दाखिल नहीं हुए हैं। लिहाजा दोनों प्राथमिकियों को रद्द कर दिया जाए।
अदालत ने कहा कि पक्षकारों के बीच विवाद निजी प्रकृति का है और वे सुलह कर चुके हैं।
ऐसे में एफआईआर रद्द की जानी चाहिए, जिससे पक्षकार शांतिपूर्ण व समरसतापूर्ण माहौल में रह सकें।
अदालत ने इस टिप्पणी के साथ 7 अगस्त 2014 को पक्षों द्वारा एक -दूसरे के खिलाफ दर्ज कराई गई दोनों एफआईआर को रद्द कर दिया।