लखनऊ। हत्या के बाद लाश के 10 टुकड़े करके उन्हें बैग में भरकर घर में छुपाने के आरोपी रविंद्र प्रताप गौड़ और रवि प्रताप गुप्ता को दोषी ठहराते हुए गिरोह बंद अधिनियम के विशेष न्यायाधीश ने दस साल की कैद और दो-दो लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
कोर्ट में सरकारी वकील ने बताया बाजारखाला थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा ने आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर का मुकदमा दर्ज कराया था। रिपोर्ट में कहा गया कि रवींद्र प्रताप गौड़ और रवि प्रताप गुप्ता का एक सक्रिय गिरोह है। आरोपियों ने 28 जुलाई 2009 को राकेश कुमार उर्फ मुन्ना की हत्या कर दी थी। लाश को 10 टुकड़ों में काटकर बैग में भरने के बाद घर में छुपा दिया था। इस घटना की रिपोर्ट भी बाजार खाला थाने में लिखाई गई थी।