सूबे में पीलीभीत से लेकर महाराजगंज तक भारत-नेपाल सीमा पर टू लेन सड़क बनेगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हाल ही में 324 किलोमीटर लंबी सीमा पर सड़क बनाने के लिए अपनी सहमति दे दी है।
जबकि, 248.32 किलोमीटर सड़क बनाने की मंजूरी 2008 में ही मिल चुकी थी। यानी वह दिन दूर नहीं जब यूपी में स्थित 572.32 किलोमीटर लंबे इस बॉर्डर पर बड़े वाहन भी सरपट दौड़ सकेंगे।
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की गतिविधियों की वजह से भारत-नेपाल सीमा लंबे समय से संवेदनशील बनी हुई है। यूपी में पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और महाराजगंज जिलों की सीमाएं नेपाल से लगी हैं।
2008 में ही मिल गई थी मंजूरी
इस संवेदनशीलता के मद्देनजर ही पीलीभीत से महाराजगंज तक बॉर्डर पर सात मीटर चौड़ी सड़क बनाने का प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेजा गया था। यहां बता दें कि इन सातों जिलों में 248.32 किलोमीटर सड़क बनाने को 2008 में ही मंजूरी मिल चुकी है, जिस पर 704.25 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
इसमें से 47.26 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण शुरू भी हो चुका है। बाकी बची 324 किलोमीटर सीमा पर टू लेन सड़क बनाने को गृह मंत्रालय ने 23 जुलाई को सहमति दे दी। गृह मंत्रालय का सहमति पत्र पीडब्लूडी मुख्यालय को पिछले सप्ताह मिल भी गया।
पूरा हिस्सा कवर होगा पहले चरण में भारत-नेपाल सीमा पर 248.32 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने की मंजूरी मिली थी। इसमें सिर्फ सिद्धार्थनगर और महाराजगंज जिलों में स्थित भारत-नेपाल सीमा के पूरे हिस्से पर सड़क बन सकती है।
बाकी पांच जिलों की सीमा के आंशिक हिस्से में ही सड़क बन पाएगी। दूसरे चरण में 324 किलोमीटर लंबी सड़क को मंजूरी मिलने से इन जिलों का भी पूरा हिस्सा कवर हो जाएगा।