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20 हजार कैदियों को राहत देगा सुप्रीम कोर्ट का फैसला

Sat, 06 Sep 2014 04:03 AM IST
विवेक त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सूबे की जेलों में बंद अंडर ट्रायल बंदियों को राहत दिलाने की कार्रवाई शुरू हो गई है।
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एडीजी जेल राजीव भटनागर ने सूबे की सभी 55 जिला जेल के अधीक्षकों को ऐसे बंदियों के बारे में सूचना मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं जो संबंधित गुनाह में होने वाली कुल सजा की आधी जेल में बिता चुके हैं।

सूबे की जेलों में बीती 31 जुलाई तक 61,613 अंडर ट्रायल बंदी थे जिनमें से 20,000 को राहत मिल सकती है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एडीजी जेल ने सेंट्रल और जिला जेल के अधीक्षकों से अंडर ट्रायल बंदियों की सजा संख्या पता करने के लिए कहा है।
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उन्होंने बताया कि सूबे की 66 विभिन्न जेलों में 87,261 बंदी हैं जिसमें से 25,648 पर दोष सिद्ध हो चुका है और वह सजा काट रहे हैं। इसमें 61,613 अंडर ट्रायल हैं।

...तो 30 प्रतिशत कैदियों को मिलेगी राहत

एडीजी का कहना है कि अंडर ट्रायल में से ऐसे बंदियों की संख्या निकलवाई जा रही है जो होने वाली सजा की आधी जेल में बिता चुके हैं। माना जा रहा है कि कुल अंडर ट्रायल बंदियों में 30 प्रतिशत को राहत मिल सकती है।

एडीजी जेल ने कहा कि एक अक्तूबर से पहले ही सभी जेलों से अंडर ट्रायल बंदियों के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर ली जाएगी। सबसे ज्यादा अंडर ट्रायल बंदी राजधानी की जिला जेल में हैं। कानपुर दूसरे और आगरा तीसरे नंबर पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बीते दिनों आधी सजा काट चुके अंडर ट्रायल बंदियों को छोड़ने की घोषणा की थी।

भीड़ कम होगी, खर्च घटेगा
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जेलों की वर्तमान स्थिति में काफी हद तक सुधार आने की उम्मीद से अफसर उत्साहित हैं। जेल विभाग के अफसर बताते हैं कि यूपी की सभी जेल खचाखच भरी हैं। कहीं-कहीं क्षमता से दो से ढाई गुना अधिक बंदी हैं।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से जेलों का लोड काफी कम हो जाएगा। आर्थिक संकट से भी राहत मिलेगी। जेल अफसरों का कहना है कि बंदियों के राशन, दवाएं और अन्य इंतजाम में खर्च होने वाले बजट में कटौती होगी जिससे अन्य कार्य कराए जा सकेंगे।

मजबूर बंदियों को भी मिलेगी आजादी

जमानत के अभाव में जेल की सलाखों के पीछे पड़े मजबूर बंदियों को भी आजादी मिलने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। राजधानी की जिला जेल में 17 ऐसे बंदी हैं जो मामूली अपराध में पकड़े गए थे। जेल अधीक्षक दधिराम के मुताबिक इन बंदियों की सजा पूरी हो चुकी है लेकिन जुर्माना देने के लिए इनके पास रुपये नहीं है।

यही वजह है इन बंदियों को जुर्माना के अभाव में अतिरिक्त सजा काटनी पड़ रही है। ऐसे बंदियों के लिए पूर्व कारागार मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने पहल की थी जो अंजाम तक नहीं पहुंच सकी।

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की संस्था बीइंग ह्यूमन ने कानपुर और बरेली जेल में बंद कई बंदियों को सलाखों से छुटकारा दिलाने में रुचि दिखाई थी। ऐसे बंदियों के प्रति संवेदना दर्शाते हुए कई स्वयंसेवी संस्थाएं भी आगे आई हैं।

अब केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इन्हें जेल से मुक्ति की संभावनाएं दिखने लगी हैं। एडीजी जेल ने बताया कि सूबे की सभी जेल के अधीक्षकों से ऐसे बंदियों के बारे में भी जानकारी जुटाने को कहा गया है जो जमानत के अभाव में बंद हैं।

देखें, जेल और यहां बंद कैदियों का पूरा रिकॉर्ड

सूबे में कुल जेल
सेंट्रल जेल-05
जिला जेल-55
मॉडल जेल-01
उप कारागार-03
नारी बंदी गृह-01
किशोर बंदी गृह-01

कुल बंदी-87261
दोष सिद्ध-25648
अंडर ट्रायल-61,613
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सेंट्रल जेलों की स्थिति

जेल--सजायाफ्ता--अंडर ट्रायल
नैनी--1715--1813
फतेहगढ़--2165--2
वाराणसी--1829--8
बरेली--2406--11
आगरा--1994--11

प्रमुख जिला कारागारों की स्थिति
जेल--सजायाफ्ता--अंडर ट्रायल
लखनऊ--494--2299
कानपुर--367--1914
मेरठ--440--1689
इटावा--218--561
आगरा--370--1880
वाराणसी--257--1055
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