केंद्र सरकार और भारतीय बैंक संघ की नीतियों के विरोध में देशभर में सरकारी बैंकों के अधिकारी शुक्रवार को हड़ताल पर रहे। ऑल इंडिया बैंक ऑफि सर्स कन्फेडरेशन (आयबॉक) के आह्वान पर हुई हड़ताल से लखनऊ सहित पूरे प्रदेश की 6500 से अधिक बैंक शाखाओं में काम नहीं हुआ।
हड़ताल के कारण लखनऊ में 950 करोड़ और प्रदेश में 12 हजार करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ। इससे हजारों लोगों को परेशानी उठानी। 26 दिसंबर को बैंक कर्मचारियों की हड़ताल प्रस्तावित है। ऐसे में अगले पांच दिन तक बैंकों में काम नहीं होने से उपभोक्ताओं की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं।
लखनऊ में इलाहाबाद बैंक की हजरतगंज शाखा में हुई सभा में आयबॉक के प्रांतीय महामंत्री दिलीप चौहान ने कहा कि अधिकारियों का वेतन ‘मिनिमम वेज कंसेप्ट’ पर होना चाहिए। बैंक संघ की वार्ता समिति ने इस पर कोई बात ही नहीं की है। बैंक संघ पिल्लई कमेटी की संस्तुतियों पर भी ध्यान नहीं दे रहा। इसमें साफ तौर पर बैंक अधिकारियों का वेतन सिविल सर्विसेज ऑफि सर के समान करने की सिफारिश है।
प्रांतीय अध्यक्ष पवन कुमार ने कहा कि वित्त मंत्रालय ने 12 जनवरी 2016 को बैंक संघ को कहा था कि वेतन समझौते पर शीर्ष वार्ता कर इसे एक नवंबर 2017 से लागू किया जाए, लेकिन आज तक कोई परिणाम नहीं निकला। आयबॉक स्केल तीन तक का वेतन समझौता किए जाने का विरोध करता है। वेतन समझौता हमेशा स्केल एक से स्केल सात तक के अधिकारियों के लिए होता रहा है।
वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक के विलय की घोषणा का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि इससे सैकड़ों बैंक शाखाएं बंद हो जाएंगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक मुश्किलें आएंगी। बैंक कर्मचारियों ने भी अधिकारियों की मांगों का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार और भारतीय बैंक संघ की नीतियों के प्रति विरोध जताया।
मीडिया प्रभारी अनिल तिवारी ने बताया कि लखनऊ की 730 शाखाओं के 10,500 बैंककर्मी और प्रदेश की 6600 शाखाओं के 84,000 बैंककर्मी हड़ताल पर रहे। इससे प्रदेश के 6900 एटीएम तथा लखनऊ के 1070 एटीएम में से अधिकतर खाली हो गए।