फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना को हराने के लिए आयुष 64, च्यवनप्राश का ट्रायल केजीएमयू में शुरू

Thu, 25 Jun 2020 12:01 PM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
कोरोना को मात देने के लिए एलोपैथ, यूनानी व होम्योपैथी के साथ आयुर्वेदिक दवाओं पर भी प्रयोग शुरू हो गया है। आयुष मंत्रालय आयुष 64 और च्यवनप्राश का मूल्यांकन करा रहा है। इनका ट्रायल केजीएमयू ने शुरू कर दिया है। 
विज्ञापन

रिसर्च के बाद तैयार होने वाली दवाओं की गुणवत्ता जांचने की जिम्मेदारी आयुष मंत्रालय की ओर से चिकित्सा संस्थानों को दी गई है।

इसी के तहत आयुष मंत्रालय ने केजीएमयू को आयुष 64 व च्यवनप्राश का ट्रायल सौंपा है। केजीएमयू के कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने बताया कि जल्द ही कुछ और आयुर्वेदिक दवाओं का भी ट्रायल होगा। इसके पीछे मंशा है कि कोरोना मरीजों और क्वारंटीन रहने वालों को सस्ती दर पर और तुरंत इलाज मिल सके।
 

अश्वगंधा, गिलोय व मुलेठी का भी होगा ट्रायल

- फोटो : amar ujala
प्रो. भट्ट ने बताया कि अश्वगंधा, मुलेठी सहित अन्य औषधि जड़ी बूटियों का रोग प्रतिरोधी क्षमता (प्रॉक्सिलैक्सिस) के तहत मूल्यांकन होगा। इम्यूनिटी बढ़ाने वाली एलोपैथिक दवाओं की अपेक्षा लोगों के घरों में मौजूद रहने वाली आयुर्वेदिक दवाएं कितनी कारगर है, इसका भी जल्द ट्रायल होगा।

कहा कि कोरोना को बेअसर करने वाली दवाएं ढूंढ़ी जा रही हैं, ताकि सिर्फ  गंभीर मरीज अस्पताल आएं। अन्य को रोकथाम करने वाली दवाओं से राहत दी जा सके। इन दवाओं के प्रॉक्सिलैक्सिस अध्ययन के बाद देशभर में हाई रिस्क वालों, क्वारंटीन किए गए या उनके संपर्क में आने वालों को यह देने की योजना है। इन दवाओं को आयुष मंत्रालय के अधीन काम करने वाले राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान ने तैयार किया हैै।
विज्ञापन

स्वास्थ्य कर्मचारियों पर च्यवनप्राश का ट्रायल

- फोटो : instagram
आयुष मंत्रालय की ओर से उपलब्ध कराए गए च्यवनप्राश में दावा किया गया है कि उसमें मौजूद जड़ी-बूटियां सांस रोग में कारगर हैं और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती हैं। ट्रायल के प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर मेडिसिन विभाग के डॉ. एसके सोनकर ने बताया कि एक से दो माह के बीच कोरोना वार्ड में 100 कर्मचारियों को च्यवनप्राश दिया जाएगा और 100 को नहीं दिया जाएगा। दोनों समूह की जांच रिपोर्ट के आधार पर  इम्युनिटी का मूल्यांकन होगा। 

आयुष 64 का ट्रायल तीन से चार माह चलेगा। वार्ड में भर्ती एक मरीज को यह दवा दी जाएगी और दूसरे को नहीं। यह वैकल्पिक व्यवस्था होगी। दोनों मरीजों की हर बार की जांच रिपोर्ट का डाटा रखा जाएगा। बाद में इसका मूल्यांकन होगा। ट्रायल के प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर और संक्रामक रोग नियंत्रण यूनिट प्रभारी डॉ. डी हिमांशु ने बताया कि इस दवा को आयुष मंत्रालय ने उपलब्ध कराया है।

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें