भारत में ट्रांसजेंडर की हालत बुरी है। वह न तो फेसबुक पर अपना अकाउंट खोल सकते हैं और न ही ऑनलाइन टिकट बुक करा सकते हैं।
‘मैं ट्रांसजेंडर हूं, इसलिए फेसबुक पर अपना अकाउंट नहीं बना सकता। सोशल मीडिया ही नहीं, ट्रेन या फ्लाइट की टिकट बुक करने वाली साइट्स का भी यही हाल है। वहां भी हमारे लिए कोई कॉलम नहीं है।’
ट्रांसजेंडर्स के हितों के लिए काम कर रहे दीपक कुमार ने इन शब्दों में ट्रांसजेंडर्स की पीड़ा को बयां किया। वे शुक्रवार को लखनऊ के चारबाग स्थित एक होटल में ‘पहचान’ संस्था के ‘हिजड़ा-हिब्बा’ कार्यक्रम में बोल रहे थे।
उनका कहना था कि हमारी पूरी लड़ाई मुख्य धारा के समाज में अपनी पहचान बनाने की है। सुप्रीम कोर्ट भी इसके लिए आदेश दे चुका है, लेकिन हमें मिला क्या?
आज के दौर में सोशल मीडिया पर खुद को रखना बहुत जरूरी हो गया है, लेकिन फेसबुक पर अकाउंट बनाते समय सिर्फ महिला या पुरुष का ही जिक्र है। ट्रांसजेंडर का विकल्प ही नहीं है। यही हाल दूसरी सोशल मीडिया साइटों का भी है।