खनन विभाग में तबादलों का खेल थम नहीं रहा है। ट्रांसफर सीजन के बाद फिर थोक में तबादले किए गए हैं।
खास बात है कि मंत्री ने ये तबादले शासन के बजाय सीधे निदेशक से करवाए। बेमौसम थोक के तबादलों के संबंध में निदेशक जहां मंत्री के आदेश का हवाला दे रहे हैं, वहीं प्रमुख सचिव भू-तत्व एवं खनिकर्म ने चुप्पी साध ली है।
जानकार बताते हैं कि ट्रांसफर सीजन के बाद अपरिहार्य परिस्थितियों में ही तबादले किए जा सकते हैं।
इसके लिए बाकायदा प्रक्रिया तय है। समूह ‘क’ के तबादले जहां मुख्यमंत्री के स्तर से होते हैं वहीं समूह ‘ख’ के तबादले मंत्री कर सकते हैं।
समूह ‘ग’ के तबादलों के लिए संबंधित अधिकारी (निदेशक) को अपने से एक स्तर उच्च अधिकारी से अनुमति लेनी होती है। समूह ‘घ’ के तबादलों के लिए ही निदेशक अपने स्तर से अनुमोदन कर सकते हैं।
सूत्रों का कहना है कि निदेशक ने समूह ‘ग’ के एक दर्जन तबादले किए हैं। इसके लिए शासनादेश के अनुसार विभागीय उच्चाधिकारियों की इजाजत नहीं ली गई।
इसी तरह खान निरीक्षक, प्राविधिक सहायक, सर्वेक्षक, खनिज मुहर्रिर, पंप परिचर व चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के भी तबादले किए गए।
कार्मिक विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मंत्री के आदेश पर तबादले किए जा रहे हों तो भी प्रक्रिया शासन स्तर से ही बढ़नी चाहिए।
वजह, मंत्री सरकार का प्रतिनिधि होता है और वह सारे निर्देश-आदेश अपने विभाग के अफसरों के जरिए देता है। यदि मंत्री ने निदेशक को ही सीधे निर्देश दिए तो निदेशक को प्रकरण शासन के संज्ञान में लाकर कार्यवाही करानी चाहिए।