भारतेंदु नाट्य अकादमी में शीतकालीन कार्यशाला में प्रशिक्षार्थियों को संबोधित करते निदेशक बिपिन
लखनऊ। भारतेंदु नाट्य अकादमी में इन दिनों चल रही शीतकालीन कार्यशाला में अभिनय की बारीकियां सीख रहे 62 प्रशिक्षणार्थी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन दो नाटकों के मंचन से करेंगे। 31 सदस्यों का एक दल महाकवि कालिदास के नाटक अभिज्ञान शाकुंतलम् का मंचन करेगा तो इतने ही सदस्यों का दूसरा दल विनय कुमार के नाटक गैजेट को मंच पर अपने अभिनय से सजाएगा।
बीएनए के निदेशक बिपिन कुमार के मार्गदर्शन में तैयार हो रहे दोनों ही नाटकों के लिए इन दिनों रिहर्सल चल रही है। अभिज्ञान शाकुंतलम् का निर्देशन वरिष्ठ रंगकर्मी रोजी दुबे कर रही हैं। इस नाटक का मंचन 22 जनवरी को संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगे प्रेक्षागृह में किया जाएगा। गैजेट का नाट्य रूपांतरण विजित सिंह ने किया है और निर्देशन रंगमंडल प्रमुख प्रिवेंद्र कुमार सिंह कर रहे हैं। इसका मंचन कैसरबाग स्थित भातखंडे विवि के कलामंडपम प्रेक्षागृह में होगा। प्रिवेंद्र सिंह ने बताया कि शीतकालीन कार्यशाला में प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों को दो भागों में बांटकर अलग-अलग कक्षाओं के जरिये प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
वंदे मातरम की महत्ता बताएगा आनंदमठ का मंचन
उत्तर प्रदेश दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर तीन दिवसीय समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान 24 जनवरी को भारतेंदु नाट्य अकादमी की ओर से बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के लिखे उपन्यास आनंदमठ की मंच पर प्रस्तुति दी जाएगी। आनंदमठ में शामिल वंदे मातरम गीत की महत्ता को बताने के लिए 20 मिनट की जोशीली मंचीय प्रस्तुति होगी। इसका निर्देशन बीएनए के निदेशक बिपिन कुमार कर रहे हैं और प्रस्तुति रंगमंडल की रहेगी।