गर्मी की छुट्टियों व त्यौहारों पर यात्रियों को राहत देने के नाम पर रेलवे ने अपनी कमाई का जरिया ढूंढ निकाला है। तत्काल स्पेशल के नाम से चलने वाली विशेष ट्रेनें रेलवे की कमाई का जरिया बनेंगी।
इन ट्रेनों का किराया बढ़ती भीड़ के हिसाब से तय होगा। यदि भीड़ बढ़ी तो महंगा हो जाएगा सफर, जबकि यात्रियों की कम संख्या पर सामान्य किराया लिया जाएगा। रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे मुख्यालय को तत्काल स्पेशल ट्रेनों को चलाने की नीति बनाने के लिए आदेश जारी कर दिया है।
जिस रूट पर अधिक भीड़ होगी, उस पर स्पेशल ट्रेनों का किराया तत्काल के नाम पर बढ़ जाएगा। अभी तक सामान्य तौर पर न्यूनतम दस प्रतिशत सीटें तत्काल कोटे में बुक की जाती हैं। जबकि पिछले साल रेलवे ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सप्तक्रांति एक्सप्रेस और पुष्पक एक्सप्रेस हर जोन की पांच ट्रेनों में पचास प्रतिशत सीटों को तत्काल में आवंटित करते हुए, उनमें प्रीमियम तत्काल भी लागू कर दिया था।
तत्काल से भी महंगा होगा ये किराया
इससे प्रीमियम कोटे का किराया तत्काल से भी दो से तीन गुना अधिक महंगा हो गया। जबकि इससे पहले रेलवे ने जनवरी 2014 में डॉयनामिक फेयर वाली प्रीमियम ट्रेनों की शुरुआत की थी।
रेलवे बोर्ड के डीडीटीसी संजय मनोचा ने पिछले दिनों सभी जोनल के मुख्य वाणिज्य प्रबंधकों को आदेश दिया है कि वह अपने यहां की स्पेशल ट्रेनों को अधिक भीड़ वाले रुटों पर तत्काल स्पेशल के नाम से चलाने के लिए आदेश जारी करें।
इस बार गर्मी में वेटिंग लिस्ट से परेशान यात्रियों को राहत देने के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाने की योजना हवा हवाई साबित हो रही है। अधिक मांग वाले रूट पर लंबी लाइन के कारण अब वेटिंग लिस्ट के टिकट भी नहीं मिल रहे हैं।
इस बार नहीं चल रही स्पेशल ट्रेनें
दक्षिण भारत से इस बार भी रेलवे ने एक भी स्पेशल ट्रेनें नहीं चलायी है। मुंबई से लखनऊ के लिए दो प्रीमियम ट्रेनों और एक जनसाधारण स्पेशल ट्रेनों के सहारे ही रेलवे यात्रियों की भीड़ निपटा रहा है।
जबकि पिछले साल तक गोरखपुर से लखनऊ होकर मुंबई के बीच रेलवे दो स्पेशल ट्रेनें भी लगातार चला रहा था। पुष्पक एक्सप्रेस और कुशीनगर सहित कई ट्रेनों में 16 मई तक वेटिंग का टिकट भी नहीं मिल रहा है। जबकि जून के पहले सप्ताह तक स्लीपर क्लास की वेटिंग 200 से अधिक पहुंच गयी है।
भोपाल से लखनऊ के लिए भी स्लीपर क्लास की वेटिंग 400 से अधिक भोपाल प्रतापगढ़ में पहुंचने के कारण यह रिग्रेट हो गयी है। इतना ही नहीं नोएडा व दिल्ली में पढ़ने वाले छात्रों की छुटिटयां होने से नई दिल्ली से लखनऊ आने वाली ट्रेनों में भी लंबी वेटिंग है।
लखनऊ मेल में जून के दूसरे सप्ताह तक स्लीपर क्लास की वेटिंग 200 से ऊपर पहुंच चुकी है। वहीं पुणे, बेंगलूर, हैदराबाद, चेन्नई और चंडीगढ़ सहित अन्य शहरों से भी लंबी वेटिंग है।
ट्रेनों में मारामारी का फायदा दलाल जमकर उठा रहे हैं। मुंबई और दिल्ली से वापसी के लिए टिकट लखनऊ से भी बन रहे हैं। यह टिकट चारबाग सहित कई अन्य रेल आरक्षण केंद्रों से बनवाकर दलाल कूरियर के माध्यम से हवाई जहाज से भिजवा रहे हैं। रेलवे की विजिलेंस टीम ऐसे ही एक गिरोह के बारे में जांच कर रही है।