शहर के मोबाइल नेटवर्क को कंजेक्शन फ्री बनाने का बीएसएनएल अधिकारियों का दावा महज कागजी नजर आने लगा है।
मोबाइल धारकों की संख्या 25 लाख से पार हो चुकी है। विभागीय अधिकारी बीते एक साल से नेटवर्क दुरुस्त करने के बस दावे कर रहे हैं।
इसके चलते ही पुराने बीटीएस पर लगातार बढ़ती ओवरलोडिंग ने बीएसएनएल उपभोक्ताओं का सिरदर्दी भी बढ़ा दी है। अक्सर मोबाइल का नेटवर्क बिजी बताता है और फोन मिलाने पर नहीं मिलता।
बीएसएनएल के पूर्वी परिमंडल प्रशासन ने बीते वर्ष अप्रैल माह में शहर के 31 स्थानों को चिह्नित कर नए बीटीएस टावर लगवाने की बात कही थे। बेहतर कनेक्टिवटी बनाने को यह बीटीएस दो चरण में लगाए जाने थे।
पहले चरण में हजरतगंज, कैसरबाग, जॉपलिंग रोड, जानकीपुरम व गोमती नगर व इंदिरा नगर एक्सचेंज केतहत आने वाले 15 स्थानों को टावर सिस्टम लगाने को चिह्नित किया गया था।
दूसरे चरण में 16 अन्य टावरों को बाकी बचे एक्सचेंज क्षेत्रों में लगाया जाना था।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि प्रस्तावित नए बीटीएस टावर लगाने की कागजी तैयारी पूरी हो जाने के बाद पर्याप्त संसाधन मिलने में हो रही लेटलतीफी आड़े आ रही है।
परिमंडल के प्रधान महाप्रबंधक के स्तर से इस बाबत केंद्रीय मुख्यालय के अधिकारियों को कई बार पत्र लिखने के बाद भी जरूरी संसाधन मुहैया नहीं हो पाए हैं।
विभाग के एक जिम्मेदार डीजीएम स्तरीय अधिकारी भी मानते हैं कि अगर केंद्रीय मुख्यालय से मांग के आधार पर जरूरी संसाधन मुहैया हो जाए तो नए बीटीएस लगवाने में ज्यादा देरी नहीं लगेगी।