अवैध निर्माण और अतिक्रमण के नाम पर व्यापारियों के उत्पीड़न का आरोप
राजधानी के व्यापारियों ने एलडीए और नगर निगम के खिलाफ मोर्चा खोलने का बिगुल बजा दिया है। व्यापारियों ने उत्पीड़न के विरोध में दिवाली बाद लखनऊ बंद का अल्टीमेटम दे दिया। लखनऊ व्यापार मंडल की बैठक में इस बंदी पर पदाधिकारियों ने सहमति दे दी।
अध्यक्ष राजेंद्र कुमार अग्रवाल और वरिष्ठ महामंत्री अमरनाथ मिश्रा ने संयुक्त रूप से बताया कि एलडीए एवं नगर निगम जो अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया कर रहे हैं वह निंदनीय है। इसमें केवल व्यापारी ही दोषी नहीं हैं, इसमें सरकार का सिस्टम भी दोषी है। सरकार कई वर्षों बाद जिसे अवैध बताती है, उस बिल्डिंग में वैध बिजली कनेक्शन, हाउस टैक्स, वाटर टैक्स, जीएसटी पंजीकरण के बाद व्यापारी कारोबार करता है। सरकार उसी समय क्यों रोक नहीं लगाती है। व्यापारी को यह मालूम ही नहीं होता है कि यह बिल्डिंग वैध है या अवैध। वह तो जब रजिस्ट्री करवा लेता है तब उसे वैध ही मानता है। सरकार उसी बिल्डिंग के ऊपर तमाम टैक्स वसूलती है। एलडीए, नगर निगम की शह पर अवैध बिल्डिंग का कारोबार फल-फूल रहा है, जिसका खामियाजा व्यापारी भुगत रहा है।
तालकटोरा में रेलवे की जमीन व्यापारियों को आवंटित की गई थी, जिस पर छोटे-छोटे कारोबारी अपना जीविकोपार्जन कर रहे हैं। वहां नगर निगम के अधिकारी मनमाने ढंग से हाउस टैक्स कर निर्धारण कर 4 से 5 लाख का बिल दे रहे हैं, जबकि उन व्यापारियों की असलियत में इतनी पूंजी भी नहीं है। बैठक में अन्य पदाधिकारी देवेंद्र गुप्ता, सतीश अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, पवन मनोचा, अभिषेक खरे, अमिताभ श्रीवास्तव, उमेश शर्मा, सुहैल हैदर अली, मनीष गुप्ता शामिल हुए।