टॉप रैंक के 300 से छात्रों ने छोड़ा लविवि
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय ने बीएचयू और दिल्ली विश्वविद्यालय से पहले काउंसलिंग कर अपनी पीठ जरूर थपथपा ली। जून में सभी स्नातक और परास्नातक दाखिले पूरे करने का नया रिकॉर्ड भी बना दिया। अब डीयू और बीएचयू की कट ऑफ जारी होने के बाद लविवि के टॉप की रैंक वाले विद्यार्थी दाखिला निरस्त करा रहे हैं। अब तक 300 से ज्यादा विद्यार्थी अपना दाखिला निरस्त कराने का आवेदन दे चुके हैं। ये आंकड़ा सिर्फ उन विद्यार्थियों का है जिन्होंने फीस वापसी के लिए आवेदन किया है। बिना सूचना अन्य संस्थानों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थी इस आंकड़े में शामिल नहीं हैं। ये सीटें अब अगले तीन साल तक खाली रहेंगी।
लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रोफेशनल कोर्सेज को जानें दें तो बाकी सभी दाखिले 29 जून तक पूरे हो गये। वहीं दूसरी ओर डीयू और बीएचयू के दाखिले अभी चल रहे हैं। बीते साल के अनुभव बताते हैं कि डीयू या फिर बीएचयू जैसे संस्थान में दाखिला मिलने पर विद्यार्थी की पहली पसंद वही संस्थान होते हैं। लविवि में दाखिला मिलने के बाद भी विद्यार्थी सीट छोड़ देते हैं। इसके बावजूद लविवि ने अपने दाखिले इन संस्थानों से पहले पूरे कर डाले। इसका नतीजा यह है कि अब लविवि की सीटें खाली हो रही हैं। विवि का नियम है कि अगर विद्यार्थी ने एक भी क्लास नहीं की है और दाखिले से एक महीने के भीतर दाखिला रद्द कराने का आवेदन किया है तो उसकी फीस 10 फीसदी राशि काटकर वापस कर दी जाती है। इसी नियम के तहत विवि में अब तक 300 से ज्यादा आवेदन दाखिला निरस्त कराने के लिए आये हैं।
सबसे ज्यादा आवेदन बीए व बीए ऑनर्स में
लविवि में दाखिला निरस्त कराने के लिए सबसे ज्यादा आवेदन बीए और बीए ऑनर्स पाठ्यक्रम में हैं। दोनों में कुल मिलाकर अब तक 146 आवेदन दाखिला रद्द कराने के लिए आ चुका है। बीए में 1270 और बीए ऑनर्स में 460 सीट हैं। दाखिला निरस्त कराने वाले विद्यार्थियों में से बीकॉम में 60, बीएससी में 56, एलएलबी ऑनर्स में 8 और 10 अन्य पाठ्यक्रमों में आ चुके हैं। वहीं परास्नातक पाठ्यक्रम में अब तक 52 आवेदन दाखिला निरस्त कराने के लिए आ चुके हैं।
बाद में करनी चाहिए बीए की काउंसलिंग
लखनऊ विश्वविद्यालय सहयुक्त महाविद्यालय शिक्षक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय का कहना है कि सीट छोड़कर जाने वाले सबसे ज्यादा विद्यार्थी बीए के होते हैं। इसलिए लविवि को बीए की काउंसलिंग डीयू और बीएचयू के दाखिले पूरे होने के बाद करने चाहिए। इस तरह से विद्यार्थी और विवि दोनों नुकसान से बच जाएंगे। विद्यार्थी को जहां सीट मिल जाएगी वहीं लविवि को इसकी फीस मिलेगी और तीन साल तक सीट खाली नहीं रहेगी।
अब दोबारा काउंसलिग कराना संभव नहीं
यह सही है कि काफी विद्यार्थियों ने दाखिला निरस्त कराया है। लेकिन खाली हुई सीटों पर दाखिला देना तकनीकी कारणों से संभव नहीं है। अब कम रैंक वाले अभ्यर्थियों को वो सीट देनी होगी जो पहले उनसे अच्छी रैंक वाले अभ्यर्थियों को सीट भरने की वजह से नहीं दी गई थी। अब अगर काउंसलिंग होगी तो पहले दाखिला ले चुके अभ्यर्थियों के साथ नाइंसाफी होगी।
प्रो. अनिल मिश्रा, प्रवेश समन्वयक, लविवि