लखनऊ-कानपुर हाईवे (एनएच-25) पर नियम-कायदे ताक पर रखकर टोल टैक्स वसूला जा रहा है। अधिकांश सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है, जोकि टोल टैक्स वसूले जाने की शर्त का सरासर उल्लंघन है। यहां तक कि पूरी तरह से जर्जर हो चुके और कुल 25 किलोमीटर लंबे सड़क के टुकड़ों को भी ठीक करने के लिए 31 मार्च तक का समय दे दिया गया है। नतीजतन आम राहगीर मुश्किल में हैं, वहीं एनएचएआई के अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से नियमों से परे उनकी जेब भी कट रही है।
किसी भी सड़क पर निजी कंपनी को टोल वसूलने का अधिकार देने से पहले भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) उसके साथ अनुबंध करता है। 75 किलोमीटर लंबा लखनऊ-कानपुर राजमार्ग ऑपरेट, मेंटेन एंड ट्रांसफर यानी ओएमटी मॉडल पर पीएंडसी कंपनी को दिया गया है। वर्ष-2013 में नौ साल के लिए उसके साथ अनुबंध किया गया। तय हुआ कि पहली साल कंपनी एनएचएआई को 150 करोड़ रुपये देगी। उसके बाद इस राशि में हर साल 10 फीसदी की बढ़ोत्तरी होगी।
अनुबंध की शर्तों में सड़क का रफनेस इंडेक्स (खुरदरापन) का भी जिक्र होता है। इस रोड पर यह रफनेस 3000 बंप प्रति किलोमीटर होनी चाहिए। आम समझ की भाषा में कहें तो तीन हजार मिलीमीटर यानी तीन मीटर प्रति किलोमीटर से ज्यादा रफनेस नहीं होनी चाहिए। अनुबंध की इस शर्त के मायने यह हैं कि प्रति किलोमीटर में औसतन तीन मीटर से ज्यादा हल्के-फुल्के जर्क (झटके) भी नहीं लगने चाहिए। लेकिन, यहां हाईवे के प्रत्येक किलोमीटर का अधिकांश हिस्सा गड्ढों में तब्दील हो चुका है।
टोल प्लाजा के इधर-उधर भी गड्ढे ही गड्ढे हैं। खास बात यह है कि अलग-अलग टुकड़ों में इस सड़क का कुल 25 किमी. हिस्सा ऐसा है, जिसे नए सिरे से बनाना है। इस काम को पूरा करने के लिए भी 31 मार्च का इंतजार किया जा रहा है। इसकी चिंता नहीं कि रफनेस इंडेक्स के अनुसार खराब सड़क को तत्काल ठीक किया जाना जरूरी है। अगर सड़क ठीकठाक हालत में है, जर्क नहीं लग रहे हैं तो जरूर नवीनीकरण में ज्यादा वक्त लिया जा सकता है।
एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी पूर्वी राजीव अग्रवाल ने कहा कि हमने सड़क को शीघ्र ठीक करवाने के निर्देश परियोजना निदेशक (पीडी) को दे दिए हैं। पता करता हूं कि अभी तक काम पूरा क्यों नहीं हुआ है। जल्द ही इस कार्य को पूरा कराया जाएगा।