लखनऊ। संतान सुख, उनकी लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए महिलाएं मंगलवार को सकट चतुर्थी का व्रत रखेंगी। इसे तिलकुटा चौथ, संकष्टी चौथ और माघ कृष्ण चतुर्थी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान को तिल, गुड़ और तिल से बने लड्डू का भोग लगाकर विधि-विधान से पूजा की जाती है। कहीं-कहीं गुड़ और तिल का सांकेतिक बकरा बनाकर उसको चांदी के सिक्के या चांदी की पायल से काटने की परंपरा भी है। इस व्रत में भगवान गणेश और चंद्र देव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि माघ कृष्ण चतुर्थी तिथि मंगलवार को सुबह 8:01 बजे से प्रारंभ होकर बुधवार को प्रात: 6:52 बजे तक रहेगी। आम तौर पर व्रत उदया तिथि के अनुसार रखा जाता है लेकिन सकट चौथ में चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व होता है। छह जनवरी को चंद्रोदय चतुर्थी तिथि में हो रहा है, अत: सकट चौथ का व्रत छह जनवरी, मंगलवार को ही रखा जाएगा।
इसी दिन गणेश जी की पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया जाएगा। छह जनवरी को चंद्रोदय समय रात 08:54 बजे होगा। इस दिन भगवान को तिल, गुड़ और तिल से बने लड्डू का भोग जरूर लगाना चाहिए। भगवान गणेश की पूजा के बाद चंद्र देव की पूजा होती है। इस व्रत का पारण चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद किया जाता है। चंद्र देव को अर्घ्य जल में दूध और तिल मिलाकर अर्पित करते हैं।
सकट चौथ पर बन रहे हैं तीन शुभ योग
छह जनवरी को सकट चौथ के दिन तीन शुभ योग बन रहे हैं, जो इस व्रत के महत्व को और बढ़ा देते हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 7:15 से दोपहर 12:17 बजे तक, प्रीति योग सुबह से लेकर रात 8:21 बजे तक। इसके बाद आयुष्मान योग का आरंभ होगा। इस दिन अश्लेषा नक्षत्र सुबह से दोपहर 12:17 बजे तक रहेगा, उसके बाद मघा नक्षत्र शुरू होगा।
सकट पूजा के लिए खरीदारी करते लोग।
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