- लक्ष्मी-गणेश की स्थापना पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर मुख कर करें।
- लक्ष्मीजी की प्रतिमा को गणेशजी के दाहिने और वरुणदेव के प्रतीक कलश को मां लक्ष्मी के पास चावलों पर स्थापित करें।
- तेल और गौ घृत के दो दीपक जलाकर प्रतिमा-कलश के पास स्थापित करें।
- दोनों ही प्रतिमाओं का स्नान, आचमन करें। लाल रंग के नववस्त्रों, कमल पुष्प अर्पण करें।
- पंचगव्य (दुग्ध, दधि, मधु, गंगाजल और शर्करा) का भोग लगाएं।
- पूजन के दौरान ‘ऊं भूर्भव: स्व: महालक्ष्मयै नम:’ के उच्चारण के साथ मां लक्ष्मी को वस्तुएं अर्पित करें।
- आरती के बाद चूरा, खील, बताशे, लइया, गट्टे, सफेद मिष्ठान्न और फल (विशेषकर अनार) चढ़ाएं।
- व्यापारी पूजन के समय बही-खातों के साथ सिक्कों की थैली-तिजोरी की चाभियां रखकर पूजन करें।