लखनऊ। रहमानखेड़ा जंगल से बाघ करीब 15 किलोमीटर दूर निकल गया है। इससे 60 गांवों के ग्रामीणों में दहशत और बढ़ने लगी है। 72 दिनों से कानपुर, इटावा व लखनऊ के टाइगर एक्सपर्ट भी बाघ को नहीं पकड़ सके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि टीम के सदस्य बाघ का रेस्क्यू करने के बहाने संस्थान में कोरम पूरा कर गांवों में घूमकर आराम फरमाते हैं। ऐसे में रणनीतियों व तकनीक को बाघ खूब चकमा दे रहा है।
रहमानखेड़ा क्षेत्र से करीब 15 किमी दूर बंशीगढ़ी गांव के जंगल में इस समय बाघ मौजूद है। इससे किसानों, खेतों में नहीं जा पा रहे हैं। शाम होते ही इलाके की सड़कों पर सन्नाटा छा जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की टीम बाघ को पकड़ने में बिना मजबूत रणनीति के जल्दबाजी कर रही है। इससे बाघ ने रहमानखेड़ा जंगल से बाहर इलाकों में घूमना शुरू कर दिया है।
डीएफओ सितांशु पांडेय ने बताया कि तीन दिनों से बाघ के पगचिह्न केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान में नहीं मिले हैं। यहां कॉम्बिंग कर रही टीम ने पुष्टि की है। बहेलिया गांव के पूर्व प्रधान कल्लू रावत ने बताया कि दो दिन पहले खेतों में छलांग लगाकर बाघ को निकलते देखा गया है। खेत में लगे कटीले तारों में बाघ के बाल मिले थे। किसान विचित्र कुमार के खेत में पानी होने से बाघ के पगचिह्न बने हैं। आरोप है कि वन विभाग बाघ के पगचिह्नों की सूचना को दबा रहा है।