लखनऊ। उन्नाव जनपद के थाना क्षेत्र औरास के अंतर्गत आने वाले रामपुर गढ़ोवा गांव के दो ग्रामीणों पर बाघ के हमला करने की खबर के बाद मलिहाबाद विकासखंड के सीमावर्ती गांवों में भी दहशत का माहौल है। ग्रामीण बाघ के डर से रात रातभर सो नहीं पा रहे हैं। इस बात की जानकारी होने पर शुक्रवार को मुख्य वन अधिकारी डॉ. रवि कुमार ने उड़नदस्ता टीम के देवेश कुमार और स्थानीय विभाग की टीम के साथ उन्नाव जनपद से सटे गांवों में सर्च ऑपरेशन किया। हालांकि इस दौरान उन्हें बाघ या उसके पग चिन्ह कहीं नहीं मिले है।
डीएफओ डॉ. रवि कुमार ने बताया कि जानकारी में आया है कि उन्नाव के औरास थाना क्षेत्र के गांव रामपुर गढ़उवा गांव के किसान रामलखन (45) बुधवार को बकरियां चराने खेतों की तरफ गए थे। शाम पांच बजे के करीब जब वह लौट रहे थे तब किसी जंगली जानवर ने उन पर हमला कर दिया। वहीं पर सरसों के खेत में पशुओं के लिए चारा काट रहे कमलेश (30) पर भी उसी जानवर ने हमला कर दिया था। इससे दोनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इलाज के दौरान कमलेश की मौत हो चुकी है। दोनों व्यक्तियों ने बाघ द्वारा हमला किए जाने की बात कही थी।
उन्होंने बताया कि उन्नाव जनपद से सटे रहीमाबाद समेत लखनऊ के लगभग एक दर्जन गांवों व आसपास के जंगलों में सर्च किया गया है। मगर लखनऊ जनपद की सीमा में अभी तक बाघ के आने की पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी सतर्कता के लिहाज से सीमावर्ती गांवों में वन कर्मियों द्वारा निरंतर निगरानी की जा रही है। साथ ही ग्रामीणों से भी सतर्क रहने की अपील की गई है। ग्रामीणों से यह भी कहा गया है कि वे अपने पशुओं को भी खुले में न रखें।
दोनों जिलों में मिले पंजों के निशान, वन विभाग की टीमें कर रहीं कांबिंग
औरास/उन्नाव। उन्नाव और हरदोई में बाघ के होने पुष्टि हो गई है। उन्नाव के रामपुर गढ़ौवा गांव में बृहस्पतिवार को बाघ के हमले से ही किसान की जान गई, जबकि एक अन्य किसान गंभीर रूप से घायल है। खेतों में पंजे के निशानों की जांच के बाद वन विभाग ने इसकी पुष्टि की है। तीन किलोमीटर के दायरे में बाघ के 300 पदचिह्न मिले हैं। उधर, हरदोई में कछौना के रामपुर गांव से सात किलोमीटर दूर गोमती नदी के किनारे सैफपुरखेड़ में बाघ के पंजे के निशान मिले। दोनों ही जिलों में वन विभाग की टीमें कांबिंग कर रही हैं।
रामपुर गढ़ौवा निवासी रामलखन (45) और इसी गांव के कमलेश (30) को जंगली जानवर ने हमला कर घायल कर दिया था। देर रात लखनऊ ट्रॉमा सेंटर में कमलेश की मौत हो गई थी। घायलों ने बाघ के हमले की बात कही तो वन विभाग के अधिकारी हरकत में आए। शुक्रवार सुबह लखनऊ मंडल के मुख्य वन संरक्षक आरके सिंह और उन्नाव के दोनों एसडीओ 50 सदस्यीय टीम के साथ मौके पर पहुंचे और कांबिंग शुरू की। परीक्षण में पंजे के निशान बाघ के होने की पुष्टि के बाद से लोग दहशत में हैं। पंजों के निशान का पीछा करते हुए टीम करीब तीन किमी दूर मलिहाबाद के खड़ौवा गांव तक पहुंची। बाघ के पंजे के निशान वापस लौटने के नहीं मिले हैं। लौटने की पुष्टि न होने से पिंजरा नहीं लगवाया गया।
गोमती किनारे मिले पंजे के निशान
कछौना (हरदोई)। सीतापुर से जिले की सीमा में घुसे बाघ को खोजने के लिए वन विभाग की टीम शुक्रवार को दूसरे दिन भी कांबिंग करती रही। कछौना के रामपुर गांव से सात किलोमीटर दूर गोमती नदी के किनारे सैफपुरखेड़ में बाघ के पंजे के निशान देखने को मिले। कुछ दूरी पर पंजे के निशान गायब हो गए। टीम रहीमाबाद रेंज तक बाघ की तलाश करेगी। इसके बाद लखनऊ की सीमा शुरू हो जाती है।