लखनऊ। रहमानखेड़ा में 57 दिनों से बाघ की दहशत कम नहीं हो रहा है। वन विभाग की टीम बुधवार रात भर भैंस के बच्चे (पड़वा) को पिंजरे में बांधकर इंतजार करती रही, पर बाघ नहीं आया। बृहस्पतिवार को संस्थान पहुंचे वैज्ञानिकों ने बाघ को आम के बागों की ओर से जाते देखा। इससे सभी घबरा गए। वैज्ञानिकों ने अफसरों को जानकारी दी। टीम ने जंगल में हथिनी व सुलोचना के साथ कॉम्बिंग की, लेकिन बाघ नहीं दिखा।
बृहस्पतिवार सुबह करीब 9 बजे केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान कार्यालय के सामने टहल रहे वैज्ञानिकों ने आम के बागों की ओर से रेलवे लाइन क्रॉस करते हुए उलरापुर जंगल इलाके में बाघ को जाते देखा। चार दिन पहले जोन एक में जिस जगह बाघ ने शिकार किया था, उससे करीब 50 मीटर की दूरी पर पड़वा को बांधकर पिंजरा भी लगाया गया है। अंदेशा था कि रात में बाघ आएगा और 15 फुट गहरे गड्ढे में या पिंजरे में फंस जाएगा पर ऐसा नहीं हुआ। बृहस्पतिवार सुबह अचानक जोन एक से बाहर निकल कर बाघ आया और चंद सेकंड में ही जोन तीन के बाहर जंगल की ओर निकल गया। वन विभाग की टीमें और अफसर बस देखते रह गए।
बेहता नाला के पास लगाया पिंजरा
रहमानखेड़ा संस्थान में बृहस्पतिवार को कई जगह पर बाघ के पगचिह्न मिले हैं। बाघ के बेहता नाला के पास ही चहलकदमी करने की बात सामने आ रही है। इसे लेकर वन विभाग ने बेहता नाला के पास पिंजरा लगाकर उसमें एक पड़वा बांधा है।
ड्रोन और सीसीटीवी कैमरे से निगरानी
बाघ पकड़ने के लिए अपर मुख्य वन संरक्षक रेनू सिंह के साथ 100 से अधिक सदस्यीय पेट्रोलिंग टीम 24 घंटे निगरानी कर रही हैं। पांच सीसीटीवी लाइव 32 फोटो ट्रैप कैमरे भी लगाए गए हैं। पांच पिंजरे भी लगे हैं। हालांकि, अफसरों का कहना है कि लाइव व ट्रैप कैमरों में अब तक बाघ की फोटो 50 से अधिक बार कैद हुई, लेकिन पकड़ने में सफल नहीं हो पाए हैं। डीएफओ सितांशु पांडे ने बताया कि ड्रोन कैमरे से लगातार बाघ की निगरानी की जा रही है।
लंगूर और पक्षी बता देते बाघ की उपस्थिति
मुख्य वन संरक्षक रेनू सिंह की मानें तो बाघ की सबसे बढ़िया और सटीक लोकेशन पक्षी और लंगूर बता देते हैं। बाघ की चहलकदमी अधिक होती है या मौजूदगी रहती है, वहां पक्षी और लंगूर चीखने-चिल्लाने लगते हैं। पक्षी सबसे अच्छी लोकेशन देने के लिए सुरीली तेज आवाज निकालते हैं। वन विभाग की टीम इन दोनों का भी सहारा ले रहे हैं। बाघ को ट्रैकुलाइज करने का काम भी एक्सपर्ट कानपुर प्राणी उद्यान, दुधवा नेशनल पार्क, कतर्नियाघाट, प्राणी उद्यान गोरखपुर और लखनऊ प्राणी उद्यान के चार डॉक्टर अपनी टीम के साथ योजना बनाकर अलग अलग दिशा में लगातार काम कर रहे हैं।
बाघ ने अब तक 18 शिकार किये
बाघ अब तक 18 शिकार कर चुका है। रहमानखेड़ा जंगल के करीब 20 किमी इलाके में बाघ की सक्रियता लगातार बनी हुई है। विशेषज्ञों की मानें तो बाघ को तीन चीजों की जरूरत होती है। पहला पानी, दूसरा कई किमी. में बना जंगल, तीसरा शिकार। ये तीनों ही रहमान खेड़ा आसपास के इलाकों में उसे आसानी से मिल रही हैं।
कीमैन की सुरक्षा के लिए पेट्रोलिंग में साथ देगा ट्रैकमैन ट्रेनर
केंद्रीय उपोषण बागवानी संस्थान के गेट के सामने ही रेल की पटरी है। यहां से रोजाना करीब 120 ट्रेनें गुजरती हैं। रेलवे गेट पर दो गेट मैन दो शिफ्ट में रुकते हैं। इस समय बाघ की दहशत से रेलवे गेट पर बने कमरे को चारों ओर से लोहे की जाली लगाकर बैरिकेडिंग कर दिया गया है। एक गेटमैन ने बताया कि अफसरों ने रात में कमरे से निकलने से मना किया है। करीब तीन किमी लंबाई में पटरी की देखरेख व मरम्मत के लिए पहले एक कर्मचारी तैनात था। बाघ आ जाने के बाद से उसकी सुरक्षा के लिए ट्रैकमैन ट्रेनर को साथ में लगाया गया है। यह कीमैन के साथ पेट्रोलिंग कराएंगे।