भटक रहे बाघ ने लखनऊ के साथ ही हरदोई व सीतापुर जिले में दहशत बढ़ा दी है। राजधानी के माल इलाके में करीब तीन किमी के दायरे में बाघ के पगमार्क ट्रेस किए गए हैं।
कुछ निशान तो महज 24 से 36 घंटे ही पुराने हैं। माल इलाके के ही आधा दर्जन पेड़ों पर खरोंच के निशान भी मिले हैं। बाघ के सर्च ऑपरेशन में जू की रैपिड रेस्क्यू यूनिट समेत वन विभाग की तीन टीमें कॉम्बिंग कर रही हैं।
बाघ एक हफ्ते से राजधानी के माल इलाके में घूम रहा था। गोधना गांव में बाघ ने शुक्रवार-शनिवार की रात ही मवेशी का शिकार किया था।
बुधवार को ज्वार के खेत में शिकार के निशान पाए जाने के बाद बृहस्पतिवार सुबह कॉम्बिंग के लिए पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों, टाइगर रेस्क्यू स्पेशलिस्ट डॉ. उत्कर्ष की टीम ने उसके पगमार्क ट्रेस किए।
डॉ. उत्कर्ष ने बताया कि बाघ के आने-जाने के दोनों के निशान मिले हैं। गोधन में जहां मवेशी का शिकार हुआ था वहां भी पगमार्क मिले हैं।
सबसे ज्यादा खतरा माल में
डॉ. उत्कर्ष का कहना है कि टाइगर वयस्क है और उसका वजन 140 से 170 किग्रा. तक हो सकता है।
टीम का कहना है कि गोधना गांव के बाहर बागों और जंगलों में कॉम्बिंग के दौरान टीम को आम समेत दर्जन भर छोटे-बड़े पेड़ों पर टाइगर के खरोंचने के निशान मिले हैं।
पेड़ों पर पांच से सात फीट ऊंचाई तक खरोंच के निशान हैं। इससे टीम का अनुमान है कि बाघ 28 से 32 माह का हो सकता है। जिस हिसाब से खरोंचने और कदमों के निशान मिले हैं उससे टीम का मानना है कि करीब 3-4 दिनों में 5 से 7 बार इस इलाके में आ चुका है।
टीम में शामिल विशेषज्ञों के मुताबिक टाइगर हनुमान गढ़ी, टिकरी खेड़ा, बहरारा, गोधन के जंगलों के नजदीक हो सकता है। इसी वजह से सबसे ज्यादा खतरा इसी इलाके में बना हुआ है।
7 किमी. के दायरे में तलाश रहा ठौर
वन रेंजर केके उपाध्याय के मुताबिक पगमार्क से ऐसा लगा रहा है कि टाइगर माल रेंज में आ और जा रहा है। उसने जहां शिकार किया था उससे गोमती नदी तीन किमी. दूर है, मदारमा झील भी है।
150 हेक्टेयर में फैला खखरा-कोलवा का घना जंगल भी है। इसी से सटा हुआ हरदोई-सीतापुर का इलाका भी है। टाइगर के अधिकतर आते-जाते पगमार्क इन्हीं इलाकों में ट्रेस हुए हैं।
एससी यादव, डीएफओ अवध ने बताया कि टाइगर के माल के गोधन गांव में आने और जाने दोनों के ही निशान मिले हैं। वो तीनों जनपदों की सीमा में आ जा रहा है। शुक्रवार-शनिवार को भी कॉम्बिंग होगी।
उन्होंने कहा कि टीमें उसे लोकलाइज (एक दायरे में रोकने) को लेकर प्लान कर रही हैं। हाथियों से कॉम्बिंग का प्लान टाइगर को लोकलाइज करने केबाद ही अमल में लाया जाएगा। ग्रामीण सतर्क रहें, अफवाह न फैलाएं।
टाइगर मस्त, टीमें पस्त
माल इलाके में जिस बाघ को लेकर दहशत है वह लगभग 7 किमी. सर्किल में वन विभाग की चार टीमों को एक हफ्ते से छका रहा है। जानकारों का मानना है कि बाघ अब तक 150 किमी की दूरी तय कर चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि जल्द ही टाइगर नया शिकार कर सकता है।
माल इलाके में मवेशी के शिकार के बाद आसपास के आधा दर्जन गांवों में बाघ की दहशत से दिवाली फीकी रही। माल कस्बे में गोधन से सटे दर्जन भर गांवों में शाम को लोगों ने निकलना कम कर दिया है। बुधवार को शिकार मिलने के बाद सहेलवा समेत आसपास के गांवों में लोगों ने मवेशी भी घर केभीतर बांधने शुरू कर दिए हैं।
उधर, बीकेटी व इटौंजा में गोमती नदी के किनारे स्थित कई गांवों में दो दिनों से धारीदार पट्टियों वाला जंगली जानवर दिखाई देने की बातें सामने आ रही हैं।
इटौंजा के लासा, सुल्तानपुर, बहादुरपुर, दुघरा और बीकेटी के कठवारा, रैंथा, अस्तल, मल्लाहनखेड़ा, चंदनकुंड, रामगढ़ा सहित कई गांवों के ग्रामीणों ने गोमती नदी के किनारे स्थित जंगल में बाघ जैसा जंगली जानवर दिखाई देने की बात कही है। हालांकि इलाके के डिप्टी रेंजर मो. सलीम ने सूचनाओं का अफवाह बताया है।
जल्द ही कर सकता है नया शिकार
डॉ. उत्कर्ष ने बताया कि ये वही टाइगर है जो करीब एक पखवाड़े पहले सीतापुर के तमाम इलाकों में देखा गया। चूंकि वहां बाघों की रुकने वाली तमाम जरूरतें मसलन भोजन की जरूरतें पूरी नहीं हो सकी, इसलिए वो आगे बढ़ गया।
टाइगर लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई से होता हुआ अब लखनऊ की ओर बढ़ा। लगभग 130-150 किमी. की दूरी तय कर चुका है। विशेषज्ञों की मानें तो बाघ को अब शिकार किए करीब 4-5 दिन हो चुका है, ऐसे में जल्द ही उसका नया शिकार सामने आ सकता है।
गौरतलब है कि बाघ ने पिछले दिनों माल इलाके के एक गांव में एक मवेशी को अपना शिकार बना लिया था। इसके बाद से कहीं किसी जानवर के शिकार होने की खबर नहीं है।