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वाणिज्य कर में क्लर्क के तीन हजार पद खाली

Tue, 23 Dec 2014 09:52 AM IST
नरेश शर्मा/अमर उजाला, लखनऊ
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वाणिज्य कर विभाग में क्लर्कों के तीन हजार से अधिक पद खाली हैं। इनमें 1463 पद वर्ष 2008 में वैट प्रभावी होने के बाद काडर रिव्यू के दौरान स्वीकृत हुए थे। पंजीकृत व्यापारियों की तादाद जहां बढ़कर 6.50 लाख हो गई है, वहीं नई भर्ती न होने और क्लर्कों के रिटायरमेंट से काम का बोझ बढ़ता जा रहा है।
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शासन ने काडर रिव्यू के दौरान पदोन्नति के लिए 951 प्रधान सहायक और कनिष्ठ सहायक के 513 पद यानी लिपिक संवर्ग के कुल 1463 पद स्वीकृत किए थे।

हालांकि हीलाहवाली के चलते ये पद अस्तित्व में नहीं आ सके जिससे न तो 951 सहायकों का प्रधान सहायक पदों पर प्रमोशन हो सका और न ही नए पदों को भरा गया। वर्ष 2008 से पहले स्वीकृत 5272 पदों के मुकाबले 3600 लिपिक ही कार्यरत हैं।

विभाग में अन्य 1600 से अधिक पद खाली चल रहे हैं, जबकि वैट लागू होने के बाद नए जोन एवं सेक्टर बनने से लिपिकों पर व्यापारियों के काम का बोझ काफी बढ़ा है। उन्हें काम निपटाने के लिए देर शाम तक दफ्तर में रुकना पड़ रहा है।
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अफसरों को मिला काडर रिव्यू का लाभ

वैट प्रभावी होने के बाद काडर रिव्यू के दौरान करीब 250 अफसरों के नए पद स्वीकृत हुए। विभाग ने ये पद असिस्टेंट कमिश्नर और उससे उच्च अफसरों को प्रमोशन करके भर दिए। नीचे जो पद खाली हुए उन पर भी नियुक्ति हो गई है।

इसी प्रकार काडर रिव्यू का लाभ स्टेनो संवर्ग भी पा चुका है।
ये हैं लिपिकों की दिक्कतें

- व्यापारियों की फाइलें समय से मेंटेन नहीं होतीं
- एक लिपिक पर 3000 फाइलें निपटाने की जिम्मेदारी
- नए जोन एवं सेक्टर बनने से अतिरिक्त पदों का दायित्व
- व्यापारियों को समय से नहीं मिलते कारोबारी फॉर्म वर्जन
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लिपिक संवर्ग कर रहा सौतेला व्यवहार

इस पर यूपी वाणिज्य मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष भूपेश अवस्थी का कहना है कि सरकार और वाणिज्य कर विभाग लिपिक संवर्ग के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।

काडर रिव्यू से अफसरों के जो नए पद स्वीकृत हुए, उन्हें भर दिया गया। अफसरों के साथ ही लिपिकों के 1463 पद स्वीकृत किए गए, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की।

यह प्रकरण प्रमुख सचिव एवं वाणिज्य आयुक्त की जानकारी में है।
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