टीम ने लखनऊ से मुजफ्फरपुर की ट्रेन में सीबीआई के नाम पर कन्फर्म हुई सीट पर राजेश साहू पत्नी व तीन बच्चों के साथ सफर करते पकड़ा। राजेश ने बताया कि उसने गोमतीनगर के हुसड़िया चौराहा स्थित आकाश बिजनेस सेंटर के शानू कुमार को 674 रुपये देकर टिकट लिए थे।
इन्हें कन्फर्म कराने को विनयखंड के शहजाद आलम को दो हजार रुपये दिए। इसी आधार पर सीबीआई ने राजेश व रैकेट में शामिल शहजाद व अमित कुमार पांडेय को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया। जबकि रैकेट के सरगना व रेल कर्मी बताया जा रहा ध्रुव सिंह, शानू व दीपक फरार है।
सीबीआई के फर्जी लेटर पैड से रेल टिकट कन्फर्म कराने के मामले में गिरफ्तार ट्रैपल एजेंटों ने कुछ रेल कर्मचारियों के नाम भी बताए हैं, जिनके काउंटर पर रहने से उनका काम आसानी से हो जाता था। इनके खिलाफ पुलिस व सीबीआई ने जांच शुरू की है।
विभाग भी ऐसे कर्मचारियों की सूची तैयार कर रहा है। सीबीआई की शिकायत पर ध्रुव, शानू कुमार, शहजाद आलम, दीपक, अमित कुमार पांडेय और टिकट कंफ र्म कराने वाले राजेश के खिलाफ केस दर्ज किया गया। वहां सीबीआई की पकड़ में आए शहजाद ने बताया कि आकाश बिजनेस सेंटर का मालिक ध्रुव सिंह है। वह दीपक (जो खुद को रेलवे का कर्मचारी बताता है) के माध्यम से टिकट कंफर्म कराता है। पुलिस के मुताबिक, दीपक टिकट कंफर्म कराने को फर्जी लेटर पैड का इस्तेमाल करता था। यह खेल छह महीने से चल रहा था।
फर्जी आधार कार्ड भी बनाते थे जालसाज
प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक जालसाज फर्जी आधार कार्ड भी बनाते थे। सीबीआई की जांच में लखनऊ (मूलत: गोरखपुर का बस्ती निवासी) में रह रहे अमित कुमार पांडेय का नाम सामने आया। पूछताछ में उसने बताया कि वह आकाश बिजनेस सेंटर पर कर्मचारी है। उसके जन्म प्रमाण पत्र की तारीख बदलने को ध्रुव और शानू ने फर्जी आधार कार्ड बनाया था। इससे उसकी उम्र छह साल कम कर दी गई। फर्जी आधार कार्ड से आठवीं पास अमित ने आगे की पढ़ाई पूरी की।