लखनऊ। पंक्चर बनाने के विवाद में मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने के मामले में एडीजे निरंजन कुमार ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मोहम्मद आलिम, सादिम और हसन अली को जानलेवा हमला, गाली-गलौज व धमकी के आरोपों से बरी किया, लेकिन उन्हें मारपीट के मामले में दोषी ठहराया है।
न्यायालय ने तीनों दोषियों को एक साल की परिवीक्षा पर छोड़ने का आदेश दिया है। उन्हें सदाचार, शांति व्यवस्था और अच्छे आचरण बनाए रखने के लिए कहा गया है। कोर्ट ने जिला प्रोबेशन अधिकारी को एक साल तक उनकी निगरानी करने का निर्देश दिया है। साथ ही, न्यायालय ने प्रत्येक पीड़ित को 15-15 हजार रुपये देने का भी आदेश दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह झगड़ा अचानक और आवेश में हुआ था। पीड़ितों को साधारण चोटें आई थीं।
अभियोजन पक्ष ने बताया कि शरीफ हुसैन ने 11 जुलाई 2015 को सआदतगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वह अपनी रिक्शा ट्रॉली का पंक्चर बनवाने गए थे। वहां मोहम्मद आलिम से उनका विवाद हो गया। आलिम ने धमकी दी, फिर अपने साथियों सादिम और हसन अली के साथ आकर हाथापाई की। वादी के भाई के बीच-बचाव करने पर आरोपियों ने फावड़े से उसके सिर पर हमला किया था।