लखनऊ। घुसपैठ के जरिये 14 वर्ष पहले भारत आए बांग्लादेश के नरैल जिले के देवभोग निवासी अरूप बख्शी का पासपोर्ट भी बन गया और अन्य तरह के पहचान पत्र भी। ऐसे में इन सभी दस्तावेज को बनवाने में मदद करने वाले पुलिस कर्मियोंं की पहचान नहीं हो सकी है। जांच की जिम्मेदारी बीकेटी और सीतापुर पुलिस को मिली है।
अरूप बख्शी 12 वर्षों से अपनी पहचान छिपाकर बीकेटी में रह रहा था। साथ ही अस्ती रोड पर अस्पताल चला रहा था। उसने कई लोगों के ऑपरेशन भी किए थे। पुलिस ने आरोपी को बुधवार को गिरफ्तार किया था। उसके पास पासपोर्ट, डीएल व अन्य पहचान पत्र बरामद हुए थे। वह वर्ष 2012 में नेपाल के रास्ते अवैध रूप से लखीमपुर खीरी में घुसा था। वहां से वह सीतापुर गया। दो वर्ष बाद बीकेटी आ गया।
2025 में ही एसआईआर के समय पकड़ में आया था अरूप
वर्ष 2025 में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान उसकी वोटर आइडी फर्जी मिलने पर अरूप जांच के घेरे में आया। 2024 में भी लोगों ने संदेह जताते हुए पुलिस को जानकारी दी थी। फिर भी नतीजा सिफर रहा। सीतापुर व बीकेटी पुलिस एक दूसरे के पाले में गेंद डालती रही। डीसीपी ने जांच के आदेश दिए तब बीकेटी पुलिस ने तेजी दिखाई।
उधम सिंह नगर में रह रहे मां-बाप
जांच में सामने आया है कि अरूप के मां-बाप हाल ही में वीजा पर भारत आए हैं और उधम सिंह नगर में रहे हैं। पुलिस उन तक पहुंचने की तैयारी में है। यह भी पता चला है कि आरोपी ने नैनीताल में भी कुछ संपत्तियां खरीदी हैं। इसकी भी पड़ताल की जा रही है।