दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 19 अप्रैल 2017 को भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, डॉ. मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती सहित कई अन्य लोगों पर लगे ढांचा ध्वंस मामले में आपराधिक साजिशों के आरोपों को फिर बहाल करने का आदेश दिया था।
कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि 1992 में ढांचा ध्वंस के समय यूपी के सीएम रहे कल्याण सिंह को मुकदमे का सामना करने के लिए आरोपी के तौर पर नहीं बुलाया जा सकता। क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत राज्यपालों को संवैधानिक छूट मिली है। लेकिन अब कल्याण राज्यपाल के पद से मुक्त हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें कोर्ट में पेश होना पड़ सकता है।
स्वाभाविक है कि उस स्थिति में वे 1991 वाले ‘रामभक्त कल्याण’ के रूप में दिखना चाहेंगे। भले ही उम्र के चलते आवाज में वह कड़क न दिखे, पर उस स्थिति में भाजपा के नेता के तौर पर भूमिका निभाना न सिर्फ कल्याण के लिए ज्यादा आसान होगा, बल्कि भाजपा के लिए भी लाभप्रद होगा।
राजनीति शास्त्री प्रो. एस. के. द्विवेदी कहते हैं कि जिस तरह मंदिर मुद्दा निर्णायक मोड़ पर दिख रहा है उसके चलते भी कल्याण का भाजपा की सदस्यता लेने का फैसला खास है। फैसला जो भी हो पर उस पर देश में नए समीकरण बनने तय हैं। उस स्थिति में संघ परिवार और भाजपा निश्चित रूप से इस मुद्दे को धार देकर देश में फिर भगवा माहौल बनाने की कोशिश करेंगे। तब कल्याण के भाजपा के मंचों पर रहना ही रणनीतिकारों के काम को आसान बना देगा। साथ ही हिंदुओं को एकजुट करना आसान हो जाएगा। कल्याण भाजपा में पिछड़े वर्ग के बड़े चेहरे हैं।
वे लोध बिरादरी से आते हैं उसी समाज के धर्मपाल की पिछले दिनों मंत्रिमंडल से विदाई हो चुकी है। लोधी भाजपा के परंपरागत वोटर रहे हैं। कल्याण की भाजपा की सदस्यता लेने के पीछे धर्मपाल की विदाई के बाद डैमेज कंट्रोल की रणनीति भी है।
लंबे प्रशासनिक अनुभव वाले शख्स को प्रदेश में संरक्षक की भूमिका में रखकर भाजपा कल्याण की हिंदूवादी छवि के साथ अगड़ों व पिछड़ों को एससी के साथ जोड़कर जहां आगे की राजनीतिक लड़ाई को 80 बनाम 40 बनाने की जमीन तैयार करना चाहती है तो संरक्षक के रूप में उनके अनुभवों से प्रदेश सरकार की भूमिका को और प्रभावी बनाना चाहती है।
भाजपाई कल्याण के स्वागत की तैयारी में जुटे हुए हैं। कल्याण 9 सितंबर को 11 बजे अमौसी हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे। जहां भाजपा नेता और सरकार के कई मंत्री उनका स्वागत करेंगे। हवाई अड्डे से वे सीधे पार्टी मुख्यालय पहुंचेंगे।
जहां उनका स्वागत होगा और वे भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। इसके बाद वो 2 माल एवन्यू स्थित आवास पर चले जाएंगे। यह आवास पहले उन्हें ही आवंटित था, लेकिन अब उनके पौत्र व प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री डॉ. संदीप सिंह को आवंटित है। यहां पर वे पत्रकारों से बातचीत करेंगे और अपनी आगे की भूमिका बताएंगे। वो कार्यकर्ताओं से भी मिलेंगे।
राजस्थान के नवनियुक्त राज्यपाल कलराज मिश्र 9 सितंबर को जयपुर स्थित राजभवन में शपथ लेंगे। शपथ-ग्रहण का साक्षी बनने प्रदेश से भी बड़ी संख्या में लोग राजस्थान जाएंगे। इनमें भाजपा के कई नेता, विधायक और सांसद शामिल हैं।
राज्य निर्माण एवं श्रम विकास सहकारी संघ (यूपीसीएलडीएफ ) के चेयरमैन वीरेंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि शपथ ग्रहण अपराह्न एक बजे होगा।