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पंचायत चुनाव: आपदा को अवसर में बदल रहे कई दावेदार, क्वारंटीन सेंटर में खाने-पीने से लेकर मनोरंजन तक कर रहे इंतजाम

Sat, 03 Apr 2021 01:50 PM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : amar ujala
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प्रदेश भर में पंचायत चुनाव के कई उम्मीदवारों ने कोरोना की आपदा को ही अवसर में बदल दिया है। दूसरे राज्यों से आने वालों के प्रति सहानुभूति दिखाकर एक-एक वोट सहेज रहे हैं। कई जगह दावेदारों ने गांवों में अस्थाई क्वारंटीन सेंटर बनवाकर वोट की बाड़ेबंदी शुरू कर दी है।

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पहले चरण में शामिल 18 जिलों में शनिवार से नामांकन शुरू हो चुका है। इन जिलों में चुनावी संग्राम तेज हो गया है। पंचायत चुनाव मैदान में उतरे उम्मीदवारों के तमाम परिजन दूसरे राज्यों में हैं। वे उन शहरों में रह रहे गांववालों को लेकर लौट रहे हैं। ऐसे में दिल्ली, मुंबई, गुजरात सहित अन्य प्रदेशों से गांवों में बड़ी संख्या में समूह में लोग लौट रहे हैं।

कोरोना महामारी को देखते हुए बाहर से आने वालों को घर में रुकने के बजाय दूसरी जगह ठहराने का इंतजाम किया गया है। प्रधान, बीडीसी से लेकर जिला पंचायत सदस्य पद के प्रत्याशी इसमें खासी दिलचस्पी ले रहे हैं। वे रुकने के इंतजाम के बहाने वोट समेटने की रणनीति अपनाए हुए हैं। पिछली बार कोरोना की वजह से गांवों में बने क्वारंटीन सेंटर को कष्टकारी माना जाता था, लेकिन इस बार ये सेंटर सुखद एहसास करा रहे हैं।
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कई निवर्तमान ग्राम प्रधानों ने आंगनबाड़ी केंद्र, प्राथमिक स्कूल आदि में रुकने का इंतजाम कराया है। जबकि अन्य कई उम्मीदवारों ने निजी स्कूल, आवासीय भवन आदि में क्वारंटीन सेंटर बनवाया है। यहां बाहर से आने वालों की सुख-सुविधाओं का ध्यान रखा जा रहा है। कई जगह तो शाम को मनोरंजन के इंतजाम भी किए गए हैं।

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क्वारंटीन सेंटर में खाने-पीने के पुख्ता इंतजाम

केस- 1: जौनपुर के मड़ियाहूं ब्लाक में गांव के बाहर बने नए आंगनबाड़ी केंद्र भवन में मुंबई से लौटे लोगों के रुकने की व्यवस्था कराई है। यहां उनके खाने पीने का पुख्ता इंतजाम है। यहां एक पूर्व प्रधान बतातीं हैं कि बाहर से आने वाले तमाम लोगों के पास रहने के लिए सिर्फ एक कमरा है। ऐसे में घर में रहेंगे तो परिवार के दूसरे सदस्यों को संक्रमण फैल सकता है। ऐसे में उनकी जिम्मेदारी है कि लोगों का ख्याल रखें। वोट के सवाल पर कहती हैं कि हम अपना धर्म निभा रहे हैं, वोटर अपना निभाएंगे।

केस- 2: महोबा के श्रीनगर ब्लाक के जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे एक दावेदार ने अपने इलाकेमें एक निजी विद्यालय को क्वारंटीन सेंटर बनवाया है। उनका तर्क है कि राजनीति समाजसेवा का काम है। इसलिए गुजरात, मुंबई से लौटने वालों के रुकने का इंतजाम कराया है। जिन लोगों की तबीयत खराब होती है, उनके इलाज की भी व्यवस्था कराई गई है। वोट के सवाल पर कहते हैं कि हमेशा समाजसेवा में लगे रहे हैं। सेवा के दम पर ही अन्य उम्मीदवारों को मात दे रहे हैं। 
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ

गिरी विकास अध्ययन संस्थान के सीएस वर्मा बताते हैं कि चुनावी सीजन में वोटरों को अपने पक्ष में लामबंद करने के लिए हमेशा नए-नए प्रयोग होते हैं। कुछ प्रत्यक्ष रूप से होते हैं तो कुछ अप्रत्यक्ष रूप से। उम्मीदवारों द्वारा क्वारंटीन सेंटर बनाना और उनके लिए हर स्तर पर इंतजाम करना वोट बटोरने की एक रणनीति है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि क्वारंटीन सेंटर में रहने वाले संबंधित उम्मीदवार के पक्ष में खड़े हो सकते हैं। उस उम्मीदवार को वोट भी कर सकते हैं जिनकी मेहमाननवाजी कुबूल कर रहे हैं।
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