कोरोना से निपटने के लिए पिछले नौ माह में यूपी ने जो प्रबंध किए और जो रणनीति बनाई, उसे देशभर में सराहा गया। कई राज्यों ने यूपी की रणनीति पर अमल कर संक्रमण पर नियंत्रण में सफलता पाई। संक्रमण की शुरुआत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में टीम-11 ने महामारी से निपटने की रणनीति बनाने की जिम्मेदारी निभाई। स्वास्थ्य विभाग के सबसे निचले स्तर तक के कर्मचारियों ने इसमें अपनी भूमिका निभाकर इस रणनीति को जमीन पर उतारा।
खासतौर से संदिग्ध मरीज की तलाश, उसकी जांच, उसके संपर्क में आए लोगों की ट्रेसिंग, इलाज, कंटेनमेंट जोन बनाकर संक्रमण की चेन को तोड़ने की रणनीति कारगर रही।
प्रदेश में एकीकृत कोविड कमान और नियंत्रण केंद्र बनाया गया। हर जिले में एक एकीकृत कोविड कमान सेंटर बनाया गया। इन्हें राज्य के नियंत्रण केंद्र से जोड़ा गया।
इन केंद्रों से मरीज के मिलने से लेकर उसे भर्ती कराने, इलाज, उसके संपर्क में आने वालों की जांच, दवाएं, क्वारंटीन, आइसोलेशन तक का कॉल सेंटर के माध्यम से प्रबंध किया गया। यूपी कोविड-19 ट्रैक्स पोर्टल के माध्यम से पूरे प्रदेश के संक्रमित मरीजों और संदिग्धों की ट्रैकिंग की गई। पूरी व्यवस्था पर इसके माध्यम से निगरानी रखी गई।
उत्तर प्रदेश में इस समय रोजाना 1.80 लाख जांचें की जा रही हैं। इनमें आरटीपीसीआर जांच लगभग 40 फीसदी करने का लक्ष्य तय किया गया है।
कोरोना संक्रमण और प्रबंधन
पहला केस-- 4 मार्च 2020 को आगरा में
कंट्रोल रूम-- 6 मार्च को आगरा से एक्टिव
पहली बार कोरोना जांच-- 23 मार्च को केजीएमयू में, 72 टेस्ट हुए
ऑनलाइन सलाह-- 5 मई को शुरू, लांच हुआ आयुष टेली कवच
सर्वाधिक केस -- 7200 27 सितंबर को
सर्वाधिक जांच-- 27 नवंबर को
घर-घर सर्विलांस-- 1 जुलाई से, 70 हजार टीमें लगाईं
सीरो सर्वे: 4 से 8 सितंबर तक, 11 जिलों में
टारगेट सैंपलिंग-- 11 जून से
ऑनलाइन जांच रिपोर्ट-- 19 सितंबर
हेल्थ वर्कर्स की रैंडम सैंपलिंग-- 25 जून को शुरू
- 7000 से ज्यादा वेंटिलेटर बेड हैं प्रदेश मे इस समय कोरोना महामारी से पहले करीब 400 ही थे।
कोरोना मरीजों की भर्ती करने के लिए त्रिस्तरीय व्यवस्था शुरू की गई। संक्रमण की शुरुआत के समय कोरोना मरीजों के लिए 75 जिलों में 750 बेड आरक्षित किए गए थे। इसके लिए चरणबद्ध तरीके से सरकारी अस्पतालों के अलावा मेडिकल कॉलेज और निजी मेडिकल कॉलेजों में बेड आरक्षित किए गए।
मरीजों के लक्षण व संक्रमण के स्तर के हिसाब से उनके लिए लेवल-1, लेवल-टू और लेवल-थ्री बेड की व्यवस्था की गई। जहां उन्हें 14 दिन तक भर्ती करके इलाज की सुविधा दी गई।
लेवल वन में सामान्य मरीज, लेवल टू में ऑक्सीजन सपोर्ट वाले और लेवल थ्री में अति गंभीर मरीज जिन्हें वेंटिलेटर की जरूरत थी, उन्हें भर्ती करने की व्यवस्था थी। इस समय प्रदेश में सात हजार से अधिक लेवल-थ्री के बेड हैं, जहां अति गंभीर मरीजों के इलाज की व्यवस्था है।
संक्रमण का पता लगाने और उसे रोकने के लिए समुदाय स्तर पर सीरो सर्वे किया गया। इसके अलावा व्यावसायिक लोगों में संक्रमण का पता लगाने के लिए फोकस सैंपलिंग की गई। इसमें शहरी झुग्गियों में रहने वाले, ऑटो चालक, सब्जी, फल बेचने वालों, मॉल, शोरूम के कर्मचारी, सिक्योरिटी गार्ड और दवा दुकानदारों तक की जांच की गई।
- सुपर स्प्रेडर तलाशने के लिए करवा चौथ, दीपावली जैसे त्योहार के मौके पर पटरी दुकानदारों, मेंहदी कलाकारों, ब्यूटी पार्लर, ज्वैलर्स, पटाखा विक्रेताओं, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक दुकान लगाने वालों की जांच की गई।
- शादियों के समय बैंड, कैटरर्स, टेंट हाउस स्टाफ, मैरिज हॉल स्टाफ, डीजे संचालकों के नमूने लेकर जांच की गई। इनमें संक्रमण मिलने पर क्वारंटीन किया गया और संक्रमण की चेन बनने से रोका गया।
प्रदेश के 11 जिलों कानपुर नगर, वाराणसी, गोरखपुर, आगरा, प्रयागराज, कौशांबी, बागपत, मुरादाबाद, गाजियाबाद, लखनऊ और मेरठ में संक्रमण की स्थिति का पता लगाने के लिए सितंबर में सीरो सर्वे किया गया। इस सर्वे में 22.1 फीसदी लोगों में कोरोना वायरस के प्रति एंटीबॉडी मिली। इन जिलों में जिलों में कुल 22,268 घरों का सर्विलांस किया गया। प्रत्येक जिले से लगभग खून के 1450 नमूने लिए गए थे। इन 16 हजार नमूनों की केजीएमयू में जांच की गई। सीरो सर्वे प्रदेश में संक्रमण की समुदाय में स्थिति जानने के लिए किया गया था।
हर जिले में 15 दिन का विशेष अभियान
प्रदेश में त्योहारों और सर्दियों के चलते कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की आशंका को रोकने के लिए 29 अक्तूबर से 15 दिन का फोकस सैंपलिंग का विशेष अभियान चलाया गया था। इस अभियान में दुकानों, रेस्टोरेंट, ब्यूटी पार्लर, धर्म स्थलों के लोगों के नमूने लिए गए।
प्रत्येक जिले में 30 प्रतिशत आरटीपीसीआर और 50 प्रतिशत एंटीजन टेस्ट रोजाना किए गए। इसमें 2.6 प्रतिशत दवा दुकानदार, 1.93 प्रतिशत मूर्ति व दीया बेचने वाले, पटरी दुकानदार, गाड़ियों के शोरूम, इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचने वाले लगभग 0.93 प्रतिशत, फल-सब्जी, पटाखा बेचने वालों में 0.69 प्रतिशत संक्रमण मिला था।
19 से 30 नवंबर तक चले विशेष जांच अभियान में मात्र 0.4 प्रतिशत संक्रमित मरीज मिले हैं। 12 दिन के इस विशेष अभियान में मलिन बस्तियों, जेलों ,वृद्धाश्रम, सब्जी-फल विक्रेता, ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के साप्ताहिक बाजारों में 6 लाख 39 हजार 855 लोगों की सैंपलिंग की गई। इसमें से 2538 लोग संक्रमित मिले। यह संख्या कुल नमूनों का मात्र 0.4 प्रतिशत है।
ई-कोविड केयर सपोर्ट नेटवर्क से मिला गंभीर मरीजों को इलाज
ई-कोविड केयर सपोर्ट नेटवर्क (ईसीसीएस) प्रणाली से प्रदेश के 52 मेडिकल कॉलेजों के कोविड अस्पतालों में गंभीर मरीजों के बेहतर इलाज के लिए कंप्यूटर, टेलीफोन और व्हाट्सएप के माध्यम से परामर्श दिया गया। मेडिकल कॉलेजों में भर्ती पांच हजार से अधिक गंभीर मरीजों को प्राइमरी व एडवांस हब के विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह दे चुके हैं। इससे संक्रमित मरीजों की मृत्युदर, गंभीर मरीजों के ठीक होने की दर भी सुधरी है।
ऑक्सीजन की दिक्कत हुई तो बढ़ाई उत्पादन क्षमता
कोरोना मरीजों के लिए सबसे ज्यादा जरूरी था ऑक्सीजन सपोर्ट। अचानक मरीज बढ़ने शुरू हुए तो प्रदेश में ऑक्सीजन सप्लाई की दिक्कत शुरू हो गई। प्रदेश में ग्रेटर नोएडा में आईनॉक्स और गाजियाबाद में लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट था। इसके बाद आनन-फानन में गाजियाबाद में एक नया लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट शुरू किया गया। प्रदेश में वर्तमान में 200 मीट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता हो गई है।