बात आपातकाल के बाद के चुनाव की है। हेमवती नंदन बहुगुणा और बाबू जगजीवन राम कांग्रेस छोड़ चुके थे। इन्होंने ‘कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी’ नाम से नई पार्टी बना ली थी। यह पार्टी भी कांग्रेस के विरोध में विपक्ष के साथ थी। वरिष्ठ समाजवादी नेता और लोकतंत्र सेनानी सूर्य कुमार बताते हैं, ‘बहुगुणा की पार्टी भी जनता पार्टी में शामिल हो गई। समझौते में बहुगुणा को लखनऊ लोकसभा सीट मिली।
आपातकाल के दौरान लंबे समय तक जेल में रहने के कारण विपक्ष के सभी नेता आर्थिक रूप से काफी टूट चुके थे। ऊपर से आपातकाल के दौरान कांग्रेसी शासन के आतंक से भयभीत व्यापारी या कोई अन्य व्यक्ति खुलकर हम लोगों की मदद के लिए तैयार नहीं था। लिहाजा हम लोगों ने जन सहयोग से चुनाव लड़ने का फैसला किया। शुरुआत बहुगुणा जी के चुनाव प्रचार से करने का निर्णय हुआ। अमीनाबाद के झंडेवाला पार्क में बहुगुणा जी की सभा थी। सभा की शुरुआत से पहले मंच से वहां आए नागरिकों से आर्थिक सहयोग मांगा गया।
मैं अपने एक परिचित के साथ चादर लेकर भीड़ के बीच गया। देखते ही देखते वह चादर रुपयों से भर गई। देखकर बहुत अच्छा लगा। कुछ और कार्यकर्ता भी चादर लेकर भीड़ के बीच गए। सभी चादरें रुपये-पैसों से भर गईं। दस चादर भर चुकी थीं, फिर भी लोगों के जेब में जो कुछ था, वे हमारी चादरों में डालने के लिए उतावले थे।
आलम यह था कि लोगों को समझाना मुश्किल हो गया। आगे भी सहयोग लेते रहेंगे, यह कहकर काफी मुश्किल से लोगों को शांत कराया गया।’ सूर्य कुमार बताते हैं, प्रदेश ही नहीं देश में भी कई अन्य स्थानों पर यह तरीका अपनाया गया। आम लोगों ने दिल खोलकर सहयोग किया। इसी चंदे से कांग्रेस के चुनाव प्रचार का मुकाबला किया गया।