फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ड्रोन कैमरे, थ्रीडी फोटोग्राफी से होगी गृहकर न देने वाले भवनों की तलाश, ये है पूरा प्लान

Mon, 12 Aug 2019 03:45 PM IST
ishwar ashish सुधीर कुमार सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
विज्ञापन

नगरीय क्षेत्रों में शत प्रतिशत गृहकर वसूली के लिए नगर विकास विभाग अब आधुनिक तकनीकों की मदद लेगा। इसके तहत ड्रोन कैमरा, थ्रीडी फोटोग्राफी, व्हीकल माउंटेन कैमरा और मोबाइल कैमरा के जरिए गृहकर से छूटे भवनों को चिह्नित किया जाएगा।

विज्ञापन


गृहकर ही नगर निकायों की आमदनी का सबसे बड़ा स्रोत है, लेकिन प्रदेश के 17 नगर निगमों समेत सभी बड़े नगर निकायों में से अधिकतर में शत प्रतिशत मकानों से गृहकर की वसूली नहीं हो पा रही है। इससे नगर निकायों को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।

गृहकर के दायरे से वंचित भवनों को चिह्नित करने के लिए सरकार ने ‘जियोग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम’ (जीआईएस) के माध्यम से सर्वे भी कराया था। इसके बावजूद नगर निकायों की बाहरी सीमाओं के आसपास की बहुत-सी संपत्तियां गृहकर से बाहर हैं।
विज्ञापन


इसके मद्देनजर उप्र नगरपालिका वित्तीय संसाधन विकास बोर्ड ने पिछले साल ही सरकार को सुझाव दिया था कि नगर निकाय के सीमा क्षेत्र में आने वाले शत प्रतिशत भवनों को गृहकर के दायरे में लाकर निकायों की आय बढ़ाई जा सकती है।

बोर्ड ने एक ऐसा स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार करने का सुझाव दिया था, जिसमें अत्याधुनिक तकनीकों की मदद से गृहकर से छूटे भवनों को चिह्नित किया जा सके। इस सुझाव पर नगर विकास विभाग ने एसओपी तैयार करने पर विचार करना शुरू कर दिया है।

विज्ञापन

बिजली कनेक्शन व आधार नंबर से भी लगाएंगे पता

बोर्ड ने सुझाव दिया है कि विद्युत विभाग से बिजली कनेक्शनों की सूची लेकर नगर निकायों में गृहकर जमा करने वाले भवनों का मिलान करने से भी गृहकर न देने वाले भवनों का पता लगाया जा सकता है। इसी तरह शहरी क्षेत्र में रहने वाले सभी लोगों के आधार नंबर के जरिए भी गृहकर के दायरे से छूटी संपत्तियों का पता लगा सकते हैं।

गृहकर वसूली में बंगलूरू सबसे आगे
बोर्ड के विशेषज्ञों ने सरकार को दिए सुझाव में बंगलूरू और जयपुर नगर निगम का हवाला दिया है। बताया गया है कि देश में सबसे अच्छी आर्थिक स्थिति बंगलूरू नगर निगम की है। हालांकि वहां भी 24 प्रतिशत ही गृहकर की वसूली हो पा रही है। जयपुर नगर निगम में भी मात्र 11 प्रतिशत वसूली हो रही है। वहीं, यूपी के सभी नगर निकायों में औसतन 11 से 14 प्रतिशत गृहकर वसूली हो रही है। इसे शत प्रतिशत करके निकायों की आय बढ़ाई जा सकती है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें