महापुरुषों, शहीदों और काम के जरिये एक तरफ राष्ट्रवादी सरोकारों को परवान चढ़ाते हुए समीकरणों को दुरुस्त करने का प्रयास किया। वहीं, धार्मिक पर्यटन बढ़ाने के संकल्प के साथ अयोध्या, मथुरा, काशी, चित्रकूट, विंध्याचल, प्रयागराज, नैमिषारण्य सहित अन्य धार्मिक स्थलों के विकास के लिए धन की व्यवस्था तथा विकास की महत्वाकांक्षी घोषणाओं से हिंदुत्व के एजेंडे पर मजबूती से डटे रहने का इरादा जताकर लोगों को साधने की कोशिश की है।
शायद यही वजह रही कि वित्त मंत्री सुरेश खन्ना नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरुद्ध आंदोलन के दौरान तोड़फोड़ करने वालों से वसूले गए जुर्माने की धनराशि बताने से नहीं चूके। सांस्कृतिक व धार्मिक एजेंडे के साथ बजट में हर मंडल में राज्य विश्वविद्यालय खोलने, महाविद्यालयों के भवन बनवाने, प्रतियोगी छात्रों को लैपटॉप देने व कौशल विकास जैसी विधाओं में विश्वविद्यालय खोलने जैसे संकल्प लिए।
युवाओं, ‘मुख्यमंत्री सक्षम सुपोषण’ व ‘महिला सामर्थ्य’ जैसी योजनाओं से ‘हर खेत को पानी’ और ‘आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना’ सहित कामों से किसानों और नई बीमा योजना से मजदूरों को संतुष्ट करने की कोशिश की गई है।
सरकार ने बजट से सियासी समीकरण साधने की कोई कोशिश नहीं छोड़ी है। ‘शहीद चंद्रशेखर आजाद ग्राम सचिवालय’ के काम को आगे बढ़ाने, चौरी-चौरा कांड के शताब्दी वर्ष के लिए विशेष बजट का प्रावधान, हर मंडल में सैनिक स्कूल खोलने का संकल्प जताने के साथ आजादी की लड़ाई के वीरों की स्मृति में संग्रहालय बनाने की घोषणा से राष्ट्रवाद के एजेंडे को धार दी। साथ ही ‘ यूपी गौरव सम्मान’ से साहित्यकारों व कलाकारों को जोड़ने और जनजातीय विरासत संजोने के लिए संग्रहालय बनाने की घोषणा से सामाजिक सरोकारों का ख्याल रखने का संदेश देने की कोशिश की है।
वाराणसी में ‘गोकुल ग्राम’ तथा गोवंश की सुरक्षा व संरक्षण पर संकल्प जताते हुए जिस तरह स्वदेशी व राष्ट्रवाद के साथ सांस्कृतिक सरोकारों को छुआ है वह सरकार के संदेश को बताने के लिए पर्याप्त है। अर्थशास्त्री प्रो. एपी तिवारी कहते भी हैं कि बजट के राजकोषीय घाटे को काफी कम रखकर तथा पुराने कामों के साथ नए कामों के लिए धन का प्रावधान कर सरकार ने बजट को ठोस बनाने का प्रयास किया है। बजट बता रहा है कि योगी सरकार नीतियों व मुद्दों को लेकर पूरी तरह स्पष्ट है और उसे इस बजट पर जनता का पूरा साथ व सहयोग मिलने की उम्मीद है।