समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि विधानसभा में पेश किया गया बजट पूरी तरह निराशाजनक और जनहित की घोर उपेक्षा करने वाला है। भाजपा ने जनता को गुमराह करने वाली घोषणाएं की हैं। सच तो यह है इस पेपर लेस बजट में किसान, मजदूर, युवा, महिला व कारोबारी किसी के भी हाथ कुछ नहीं आया। सबके हाथ खाली रह गए। भाजपा का ये विदाई बजट सबको रूला गया है। वहीं सदन में नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने भी इस बजट की आलोचना करते हुए इसे अर्थहीन व निराशाजनक बताया।
अखिलेश यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने जाते-जाते झूठे वादों की झड़ी लगाई है और किसानों, नौजवानों, महिलाओं तथा व्यापारियों सभी को धोखा दिया है। भाजपा के बजट से गरीबों को नहीं अमीर और उद्योगपतियों को और ज्यादा लाभ मिलेगा। बढ़ती मंहगाई पर नियंत्रण का कोई संकेत नहीं है। बजट में विकास की दिशा नदारद है। अखिलेश यादव ने कहा कि आज किसान संकट में है और वह परेशान है। डीजल और पेट्रोल की कीमत आसमान छू रही है। गन्ना किसानों के बकाया भुगतान के बारे में कोई घोषणा नहीं है। दुग्ध समितियों के 2 साल से बकाए पैसे के भुगतान का कोई प्रावधान इस बजट में नहीं है।
अखिलेश यादव ने कहा कि रोजगार के नए अवसर सृजित करने में भाजपा सरकार फेल हुई है। बढ़ती ऊर्जा की आवश्यकताओं को भाजपा ने बजट में अनदेखी की है। उन्होंने कहा इस बजट से जनता की परेशानियां कम नहीं होंगी। इससे भाजपा सरकार के खिलाफ आक्रोश भी बढ़ेगा। सपा सरकार बनने पर जनहित की योजनाएं गति पाएंगी और लोगों में खुशहाली आएगी।
अर्थहीन बजट में किसान, रोजगार व महिला सुरक्षा नदारद : रामगोविंद
नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने योगी सरकार के बजट को अर्थहीन और निराशाजनक बताया है। उन्होंने कहा कि महंगाई व मुद्रास्फीति जोड़कर देखें तो यह पिछले वर्ष के मुकाबले छोटा बजट है। इसमें किसानों की आय दोगुनी करने का कोई उल्लेख नहीं है। बजट में किसानों की बिजली दरों में कमी, गन्ना मूल्य में वृद्धि, डीजल और रसोई गैस के मूल्य में कटौती का एलान नहीं है।
चौधरी ने मीडियाकर्मियों से कहा कि पिछले वर्ष 5.12 लाख करोड़ का बजट था, जबकि इस बार यह 5.50 लाख करोड़ का है। 2020-21 के सितंबर व अक्तूबर में मुद्रा स्फीति 7.6 फीसदी थी। इस लिहाज से बजट राशि 7.3 फीसदी अधिक होने का दावा ठीक नहीं है। सरकार ने बजट को समग्र विकास के लिए समर्पित तो बताया पर इसका अर्थ नहीं बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के पिछले चार बजट में कोई विकास नहीं दिखाई दिया। यह बजट भी धरातल पर दिखाई नहीं देगा। इसीलिए पेपरलेस पेश किया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि राज्यपाल का अभिभाषण क्यों पेपर लेस नहीं था। बजट में रोजगार, नौकरीपेशा व किसानों के लिए कुछ नहीं है। यह जनहित की उपेक्षा करने वाला बजट है। जो सरकार दो साल से दुग्ध समितियों को भुगतान नहीं कर सकी, तीन साल से गन्ना मूल्य बढ़ाने के साथ ही भुगतान नहीं कर सकी, उससे बजट में क्या उम्मीद की जा सकती है। सरकार ने पब्लिक के हाथ में झुनझुना पकड़ा दिया है।