लखनऊ। मोहनलालगंज में धर्मांतरण गिरोह के पकड़े जाने के बाद नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं। इलाके में धर्म बदलने वाले लोगों का रहन-सहन अचानक बदल गया। कच्चे मकान पक्के बन गए। पुलिस ने ऐसे कई लोगों से पूछताछ की तो वे गुमराह करने लगे। पुलिस ने पूछा कि अचानक से मकान बनवाने के लिए कहां से पैसे आए। इसके जवाब में लोगों ने कहा कि वे मजदूरी करके रुपये जमा किए थे।
एडीसीपी दक्षिणी वसंथ रल्लापल्ली के मुताबिक अब तक पड़ताल में किसी ने जबरन धर्मांतरण की बात नहीं कबूल की है। लगातार लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी कमाई से मकान बनवाया है। उधर, छानबीन में सामने आया है कि ईसाई धर्म अपनाने वाले लोग पहले सामान्य परिवार से थे। हालांकि, धर्म बदलने के बाद वे अचानक रईस हो गए। पुलिस का कहना है कि गिरोह के सरगना डेनियल के दो बैंक खाते हैं। इनमें एक चर्च से जुड़ा है। चर्च वाले बैंक खाते में हर माह उसके पास पैसे भेजे जाते थे, जिससे वह प्रचार प्रसार की सामग्री खरीदता था। उधर, सरोजनीनगर इलाके में भी करीब 20 से 25 लोगों के धर्मांतरण की बात सामने आई है। स्थानीय निवासी ने बताया कि गौरी के नई बस्ती और बंथरा के खसरवारा गांव में 20 से 25 लोग धर्म बदल चुके हैं। ये लोग प्रत्येक रविवार को गांव से कुछ दूरी पर उमेद खेड़ा स्थित चर्च में प्रार्थना सभा में शामिल होने जाते हैं। धर्म परिवर्तन के लिए सभी को आर्थिक प्रलोभन दिया जाता है। आरोप है कि लोगों को बेटियों की शादी कराने, मकान बनवाने और हर महीने आर्थिक सहायता देने का लालच दिया जाता है। ग्रामीण का दावा है कि गांव में एक ही जाति के लोग इस गतिविधि से जुड़े हैं।